शिक्षा

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विद्यालय में बच्चों के नामांकन की स्थिति और उनके सीखने के स्तर की जांच के लिए 'असर' यानी एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट की टीम हर साल एक सर्वेक्षण करती है. यह ग्रामीण भारत के घरों और स्कूलों में किया जाने वाला सबसे बड़ा सर्वेक्षण है. स्वयंसेवी संस्था प्रथम के सहयोग से यह सर्वेक्षण जिला स्तर के स्वयंसेवी संस्थाओं के स्वयंसेवकों के माध्यम से भारत के तकरीबन सभी जिलों में किया जाता है. 2016 का असर-सर्वेक्षण देश के 589 जिलों में सम्पन्न हुआ है. इस वर्ष यह सर्वेक्षण 17,473 गांवों के 450,232 घरों 3-16 आयु-वर्ग के 562,305 बच्चों तक पहुंचा.हर साल असर यह जानने की कोशिश करता है क्या ग्रामीण भारत में बच्चे स्कूल जाते हैं, क्या वे सरल पाठ पढ़ सकते हैं और क्या वे बुनियादी गणित करने में सक्षम हैं.

एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन(असर) रिपोर्ट 2016 के प्रमुख निष्कर्ष--

 
2014 से 2016 के बीच राष्ट्रीय स्तर पर सभी आयु-वर्ग के नामांकन में वृद्धि हुई है !

 
-- 2014 से लेकर अभी तक 6-14 आयु वर्ग के बच्चों के नामांकन की संख्या 96 प्रतिशत या अधिक रही है. यह अनुपात 2014 के 96.7% से बढ़कर 2016 में 96.9% हो गया है 

 
--  15-16 आयु-वर्ग के लड़के लड़कियों के नामांकन में भी सुधार हुआ है. यह अनुपात 2014 में 83.4% था जो 2016 में बढ़कर 84.7% हो गया है |

 
-- हालांकि कुछ राज्यों में विद्यालय ना जाने वाले बच्चों(6-14 आयु-वर्ग) की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है. ऐसे राज्यों में मध्यप्रदेश (3.4% से4.4%), छत्तीसगढ़ (2% से 2.8%) और उत्तरप्रदेश (4.9% से 5.3%) शामिल हैं.|

 
-- कुछ राज्यों में विद्यालय-वंचित लड़कियों(11-14 आयु-वर्ग) का अनुपात इस साल भी 8 प्रतिशत से ज्यादा है. ऐसे राज्य हैं राजस्थान (9.7%)  और उत्तरप्रदेश (9.9%). 2016 में मध्यप्रदेश (8.5%) भी इन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है |
 
 
रिपोर्ट के अन्य मुख्य निष्कर्ष मिसाल के लिए निजी स्कूलों में नामांकन की स्थिति, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की योग्यता की स्थिति, विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति की हालत, स्कूलों में मौजूद सुविधाओं के बारे में विशेष तथ्य सिलसिलेवार इस लिंक पर क्लिक करके पढ़े जा सकते हैं.
 
 
http://img.asercentre.org/docs/Publications/ASER%20Reports/ASER%202016/aser2016_nationalpressrelease_hindi.pdf
 
 

Rural Expert


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