सवाल सेहत का

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What's Inside

[inside]यूनिसेफ द्वारा प्रस्तुत कमिटिंग टू चाइल्ड सरवाइवल- अ प्रामिस रिन्यूड, प्रोग्रेस रिपोर्ट-2012[/inside] नामक दस्तावेज के अनुसार- http://www.unicef.org/media/files/APR_Progress_Report_2012
_final.pdf

 

- विश्व में पाँच साल से कम उम्र के तकरीबन 19,000 बच्चे प्रति दिन मृत्यु के शिकार होते हैं।

- पाँच साल से कम उम्र में मृत्यु का शिकार होने वाले बच्चों की संख्या को सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों के अनुसार 2.5%,सालाना की दर से घटाना है, यह दर मौजूदा परिस्थितियों में अपर्याप्त साबित हो रही है।

- भारत में बीते वर्ष( 2011) पाँच साल से कम उम्र के 10 लाख 70 हजार बच्चों की मृत्यु हुई। यह संख्या विश्व के देशों में सर्वाधिक है। यह संख्या पाँच साल से कम उम्र में मृत्यु का शिकार हुए कुल बच्चों(विश्व) की संख्या का 24 फीसदी है।

- पाँच साल से कम उम्र के जो बच्चे बीते साल(2011) मृत्यु का शिकार हुए उनकी कुल तादाद का एक तिहाई हिस्सा सिर्फ भारत और नाइजीरिया से है।

- रिपोर्ट के अनुसार पाँच साल से कम की उम्र में मृत्यु के शिकार होने वाले कुल बच्चों में 50 फीसदी सिर्फ पाँच देशों- भारत, नाइजीरिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑव कांगो, पाकिस्तान और चीन से हैं।

- चीन में बीते साल पाँच साल से कम उम्र के 2.49 लाख बच्चे मृत्यु का शिकार हुए, जबकि इथोपिया में 1.94 लाख और बांग्लादेश तथा इंडोनेशिया में 1.34 लाख। युगांडा में इस आयु वर्ग के कुल 1.31 लाख बच्चे मृत्यु का शिकार हुए जबकि अफगानिस्तान में 1.28 लाख। सर्वाधिक संख्या में बाल-मृत्यु वाले देशों में युगांडा और अफगानिस्तान का स्थान 9 वां और 10 वां है, भारत का पहला।

- साल 2011 में पाँच साल से कम उम्र में मृत्यु का शिकार होने वाले कुल बच्चों का 49 फीसदी हिस्सी उप-सहारीय अफ्रीकी देशों का है जबकि इस मामले में दक्षिण एशिया की हिस्सेदारी 33 फीसदी की है। शेष विश्व का हिस्सा इस मामले में साल 1990 में 32% का था जो दो दशक बाद घटकर 18% रह गया है।

- पाँच साल से कम उम्र के जो बच्चे बीते साल(2011) मृत्यु का शिकार हुए उनकी कुल तादाद का एक तिहाई हिस्सा सिर्फ भारत और नाइजीरिया से है।

- निमोनिया या फिर डायरिया से हाने वाली कुल वैश्विक बाल-मृत्यु का 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा सिर्फ चार देशों- भारत( 10 लाख 70 हजार) , नाइजीरिया( 7 लाख 56 हजार) , डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑव कांगो( 4 लाख 65 हजार) और पाकिस्तान( 3 लाख 52 हजार) में केंद्रित है।

- सिगापुर में बाल-मृत्यु की दर सर्वाधिक कम यानी 2.6 रही जबकि स्लोवेनिया और स्वीडन की इससे थोड़ी ही पीछे( दोनों देशों में 2.8)

- रिपोर्ट के अनुसार पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु का एक बड़ा कारण निमोनिया है। साल 2011 में वैश्विक स्तर पर पाँच साल कम उम्र के जितने बच्चे मृत्यु का शिकार हुए उनमें 18 फीसदी मामलों में मृत्यु का कारण निमोनिया रहा। निमोनिया से मृत्यु का शिकार होने वाले ज्यादातर बच्चे उपसहारीय अफ्रीकी देशों और दक्षिण एशिया के थे।

- वैश्विक स्तर पर बाल-मृत्यु के पाँच अग्रणी कारणों में शामिल हैं- निमोनिया (18 फीसदी); निर्धारित अवधि से पहले जन्म होने के कारण उत्पन्न जटिलताएं (14 फीसदी); डायरिया (11 फीसदी) और मलेरिया (7 फीसदी)

- रिपोर्ट के अनुसार साल 2011 में पाँच साल से कम उम्र के जितने बच्चों की मृत्यु हुए उसमें एक तिहाई मौतों का कारण कुपोषण रहा।

- यूनिसेफ की इस रिपोर्ट के अनुसार डायरिया का एक बड़ा कारण खुले में शौच करना है। विश्व में अब भी 1.1 विलियन आबादी खुले में शौच करने को बाध्य है।

- डायरिया जनित मृत्यु का एक कारण साफ-सफाई की कमी है। विश्व में 2.5 बिलियन आबादी साफ-सफाई की परिवर्धित सुविधा से वंचित है इस तादाद का 50 फीसदी हिस्सा सिर्फ चीन और भारत में है। विश्व में 78 करोड़ लोगों को साफ पेयजल उपलब्ध नहीं है।

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