सवाल सेहत का

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What's Inside

 
रोईंग डेंजर ऑव नान-कम्युनिकेबल डिजीज- एक्टिंग नाऊ टू रिवर्स कोर्स(सितंबर 2011, वर्ल्ड बैंक) नामक दस्तावेज के अनुसार, http://siteresources.worldbank.org/HEALTHNUTRITIONANDPOPUL
ATION/Resources/Peer-Reviewed-Publications/WBDeepeningCris
is.pdf
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  • हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, श्वास-रोग जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों का खतरा निम्न और मध्यवर्ती आय वर्ग वाले देशों में बढ़ रहा है।.

 

  • उपसहारीय अफ्रीकी देशों में साल 2030 तक बीमारियों से काल-कवलित होने वाले कुल लोगों में 46 फीसदी गैर-संक्रामक बीमारियों के शिकार होंगे जबकि इन देशों में गैर-संक्रामक बीमारियों से होने वाली मौत की तादाद 2008 में 28 फीसदी थी। दक्षिण एशिया में गैर-संक्रामक बीमारियों से होने वाली मृत्यु की संख्या (कुल मृत्युसंख्या में) इसी अवधि में प्रतिशत पैमाने पर 51 से बढ़कर 72 फीसदी पर पहुंच जाएगी। इन मौतों में से कम से कम 30 फीसदी मामले ऐसे हैं जिन्हें उपचार के बदौलत रोका जा सकता है। दूसरी तरफ निम्न आयवर्ग में गिने जाने वाले देशों में एचआईवी , मलेरिया, टीबी जैसे संक्रामक रोगों का जोर बढ़ेगा।

 

 

  • निम्न और मध्य आयवर्ग में आने वाले देशों में गैर-संक्रामक बीमारियों का बोझ अर्थव्यवस्था, चिकित्सा-व्यवस्था , पारिवारिक और व्यक्तिगत लिहाज से बहुत ज्यादा है। ऐसे कई देशों में गैर-संक्रामक बीमारियां कम उम्र के लोगों को भी हो रही हैं और इस कारण बीमारी की अवधि में बढ़ोतरी हो रही है साथ ही कम उम्र में मृत्यु का शिकार होने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी है। इसका दुष्परिणाम उत्पादकता पर पड़ रहा है।.

 

  • विकासशील देशों में गैर-संक्रामक रोगों का बड़ा कारण अरामतलब जीवनशैली, जीवन के पहले 1000 दिनों में कुपोषण का शिकार होना तथा अस्वास्थ्यकर भोजन( जैसे नमक, चीन और तेल-घी का ज्यादा इस्तेमाल) है। तंबाकू का सेवन और प्रदूषण का भी इन बीमारियों के कारण साबित हो रहे हैं।

 

  • साक्ष्यों से पता चलता है कि गैर-संक्रामक बीमारियों का बोझ आधा किया जा सकता है बशर्ते स्वास्थ्य-व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त हो और बीमारियों से बचने के बारे में प्रभावकारी कार्यक्रम लागू किए जायें। तंबाकू सेवन को हतोत्साहित करना मसलन उसपर कराधान ऊँचा रखना तथा नमक-चीनी का कम सेवन एवम् अप्रसंस्कृत खाद्य-पदार्थों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करना इसका एक कारगर उपाय है।

 

  • साल 2030 तक मध्य आयवर्ग में आने वाले देशों में कैंसर की तादाद 70 फीसदी तक बढ़ सकती है और निम्न आयवर्ग वाले देशों में यह इजाफा 82 फीसदी तक हो सकता है।

 

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  • दक्षिण एशिया में बीमारियों से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण कार्डियोवास्कुलर रोग हैं।दक्षिण एशिया में प्रथम हार्ट-अटैक औसतन 53 साल की उम्र के लोगों को होता है जबकि शेष विश्व में इसकी औसत उम्र 59 साल है।

 

  • एक हाल के अध्ययन में बताया गया है कि भारत में गैर-संक्रामक रोगों का असर क्या पड़ता है। इस अध्ययन के अनुसार अगर भारत से गैर-संक्रामक रोगों को खत्म कर दिया गया होता तो भारत की 2004 की जीडीपी 4 से 10 फीसदी ज्यादा होती।.

 

  • साल 1995-1996 से 2004 के बीच गैर-संक्रामक रोगों के उपचार पर लोगों की जेब से होने वाले खर्च में 15 फीसदी का इजाफा हुआ है। 2004 में गैर-संक्रामक रोगों के उपचार पर लोगों ने अपनी जेब से 47 फीसदी खर्च किया जबकि पहले यही संख्या 32 फीसदी की थी।इसके अतिरक्त इस खर्चे का 40 फीसदी हिस्सा उधार के रुप में जुटाना पडा या फिर जेवर-जमीन आदि चीजें बेचकर।
 
 

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