गरीबी और असमानता

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ग्लोबल मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स 2020 – चार्टिंग पाथवेज आउट ऑफ मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी: एचिविंग द एसडीजी (जुलाई 2020 में जारी) नामक रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं: (देखने के लिए यहां क्लिक करें.)

• चार देशों- अर्मेनिया (2010–2015/2016), भारत (2005/2006 2015/2016), निकारागुआ (2001–2011/2012) और नार्थ मैसेडोनिया (2005/2006--2014) ने 5.5-10.5 वर्षों में ही अपने वैश्विक MPI-T वेल्यू को आधा कर दिया (अर्थात बहुआयामी गरीबी सूचकांक, समय के साथ सख्त तुलना के लिए सामंजस्यपूर्ण संकेतक परिभाषाओं पर आधारित है). ये देश दिखाते हैं कि बहुत भिन्न गरीबी स्तर वाले देशों में भी यह संभव है. भारत की बड़ी आबादी के कारण ये देश दुनिया की आबादी का लगभग पांचवां हिस्सा हैं.

• भारत और निकारागुआ की समय अवधि क्रमशः 10 और 10.5 वर्ष है, और उस समय के दौरान दोनों देशों ने बच्चों से संबंधित अपनी एमपीआई-टी वेल्यू को आधा कर दिया. इसलिए बच्चों के लिए निर्णायक बदलाव संभव है लेकिन इसके लिए सचेत नीतिगत प्रयासों की आवश्यकता है.

• अपने MPI-T वेल्यू को कम करने वाले 65 देशों में से 50 ने गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या को भी कम कर दिया. सबसे बड़ी गिरावट भारत में देखी गई, जहां लगभग 27.3 करोड़ लोग 10 वर्षों में बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले. चीन में चार वर्षों में 7 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले, और बांग्लादेश में 1.9 करोड़ लोगों और इंडोनेशिया में लगभग 80 लाख लोग पांच वर्षों में गरीबी से बाहर निकले. पाकिस्तान में लगभग 40 लाख लोग पाँच वर्षों में गरीबी से बाहर निकले. कुछ छोटे देशों ने भी उल्लेखनीय गिरावट हासिल की: पांच वर्षों में नेपाल में लगभग 40 लाख और केन्या में 30 लाख लोगों से अधिक लोग गरीबी के चंगुल से मुक्त हुए.

• तीन दक्षिण एशियाई देश (बांग्लादेश, भारत और नेपाल) अपने एमपीआई-टी वेल्यू को कम करने के लिए 16 सबसे तेज देशों में से एक थे.

• दस देशों में टीकाकरण से वंचित 60 प्रतिशत बच्चों की संख्या है, और डीटीपी 3 के टीकाकरण से वंचित 40 प्रतिशत बच्चे सिर्फ चार देशों में रहते हैं: नाइजीरिया, भारत, पाकिस्तान और इंडोनेशिया. टीकाकरण की 89 प्रतिशत कवरेज दर के बावजूद भी भारत में 26 लाख बच्चे पूरी तरह से टीकाकरण से वंचित हैं, यह आंकड़ा दिखाता है कि उच्च टीकाकरण कवरेज होने के बावजूद भी आबादी वाले विकासशील देशों में टीकाकरण से वंचित बच्चों की संख्या कितनी अधिक है.

• चीन और भारत में द्रवीभूत पेट्रोलियम गैस कार्यक्रमों और स्वच्छ वायु नीतियों के परिणामस्वरूप 2010 से अब तक 45 करोड़ से अधिक लोग स्वच्छ खाना पकाने वाले ईंधन के दायरे में आए हैं. लेकिन उप-सहारा अफ्रीका में चुनौती बरकरार है, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में 46.3 करोड़ लोग गरीब हैं और खाना पकाने के ईंधन में वंचित हैं.

भारतीय परिदृश्य

2015-16 में गैर-मौद्रिक गरीबी से प्रभावित लोगों के अनुपात के मामले में शीर्ष पांच राज्य / केन्द्रशासित प्रदेश बिहार (52.5 प्रतिशत), झारखंड (46.5 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (41.1 प्रतिशत), उत्तर प्रदेश (40.8 प्रतिशत) और छत्तीसगढ़ (36.8 प्रतिशत) थे. गैर-मौद्रिक गरीबी से प्रभावित लोगों के अनुपात के मामले में सबसे कमतर पांच राज्य / केंद्रशासित प्रदेश केरल (1.1 प्रतिशत), दिल्ली (4.3 प्रतिशत), सिक्किम (4.9 प्रतिशत), गोवा (5.5 प्रतिशत) और पंजाब (6.1 प्रतिशत) थे.

2005-06 और 2015-16 के बीच बहुआयामी हेडकाउंट अनुपात (एच) में सबसे अधिक गिरावट अरुणाचल प्रदेश (35.6 प्रतिशत अंक) के लिए नोट की गई है, इसके बाद त्रिपुरा (34.3 प्रतिशत अंक), आंध्र प्रदेश (33.6 प्रतिशत अंक), नागालैंड (33.3 प्रतिशत अंक) और छत्तीसगढ़ (33.2 प्रतिशत अंक) थे.

2015-16 में, गैर-मौद्रिक गरीबी से प्रभावित लोगों की संख्या के मामले में शीर्ष पांच राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश उत्तर प्रदेश (8.47 करोड़ ), बिहार (6.18 करोड़), मध्य प्रदेश (3.56 करोड़), पश्चिम बंगाल (2.62 करोड़) और राजस्थान (2.36 करोड़) थे. गैर-मौद्रिक गरीबी से प्रभावित लोगों की संख्या के मामले में निचले पांच राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में सिक्किम (27,000), गोवा (89,000), मिजोरम (1.10 लाख), अरुणाचल प्रदेश (2.76 लाख) और नागालैंड (3.77 लाख) थे.

2005-06 और 2015-16 के बीच बहुआयामी गरीबी से प्रभावित लोगों की संख्या में सबसे अधिक गिरावट उत्तर प्रदेश (लगभग 4.6 करोड़) में दर्ज की गई है, इसके बाद आंध्र प्रदेश (2.75 करोड़), पश्चिम बंगाल (2.72 करोड), महाराष्ट्र (2.12 करोड़) और कर्नाटक (लगभग 2 करोड़) हैं.

2015-16 में, गरीबी की तीव्रता के मामले में शीर्ष पांच राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश बिहार (47.2 प्रतिशत), राजस्थान (45.3 प्रतिशत), मिजोरम (45.2 प्रतिशत), उत्तर प्रदेश, झारखंड और असम (प्रत्येक 44.7 प्रतिशत) और मेघालय (44.5 प्रतिशत) थे. गरीबी की तीव्रता के मामले में सबसे नीचे के पांच राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश गोवा (37.2 प्रतिशत), केरल (37.3 प्रतिशत), हिमाचल प्रदेश (37.4 प्रतिशत), तमिलनाडु (37.5 प्रतिशत) और सिक्किम (38.1 प्रतिशत) थे.

2015-16 में, बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) के संदर्भ में शीर्ष पांच राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश बिहार (MPI = 0.248), झारखंड (MPI = 0.208), उत्तर प्रदेश (MPI = 0.183), मध्य प्रदेश (MPI = 0.182) और असम (MPI=0.162) थे. बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) के संदर्भ में सबसे नीचे से पांच राज्य / केंद्र शासित प्रदेश केरल (MPI = 0.004), दिल्ली (MPI = 0.018), सिक्किम (MPI = 0.019), गोवा (MPI = 0.020) और पंजाब (MPI = 0.025) थे.


 

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