न्याय:कितना दूर-कितना पास

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द एक्सेस टू जस्टिस, प्रैक्टिस नोटस्, यूनाइटेड नेशन्स डेवलपमेंट प्रोग्राम-यूएनडीपी(2004) के नामक दस्तावेज के अनुसार-

न्यायिक सेवा हासिल करने वालों के पक्ष से देखें तो भारत में न्याय व्यवस्था निम्नलिखित कारणों से कमजोर है-

 
1. बहुत देरी से मिलता है न्याय, न्यायिक सेवा हासिल करने में खर्चे ज्यादा लगते हैं। इससे हर पीड़ित उसे हासिल नहीं कर पाता।सत्ता का दुरुपयोग।इसके परिणाम जबरिया जामातलाशी, कुर्की जब्ती, नजरबंदी और गिरप्तारी के रुप में नजर आता है। अदालती फैसलों पर अमल बड़ी मशक्कत के बाद हो पाता है।

2. विधि व्यवस्था भेदभावमुक्त नहीं है और वह समय रहते पीड़ित को अत्याचार से बचाने के उपाय नहीं प्रदान कर पाती।
 

3. विधि व्यवस्था में लैंगिक तथा जातिगत पूर्वग्रह काम करते हैं। बच्चे, महिलायें, वंचित तबके के लोग और गरीब इसी कारण आसानी से न्याय हासिल नहीं कर पाते।निरक्षर और शारीरिक रुप से अक्षमता के शिकार लोगों को भी प्रभावकारी ढंग से इंसाफ नहीं मिल पाता।

4. बंदीगृह में बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा का अभाव।

5. कानूनी बारिकियों सहित कानून द्वारा प्रदत्त अधिकारों के बारे में जानकारी का अभाव।

6. पीडित को जरुरत के समय पर्याप्त विधिक सहायता ना मिल पाना।

7. सुधार के कार्यक्रमों में जन-भागीदारी की कमी।

8. कानूनों का बाहुल्य।

9. कानूनी प्रक्रिया में औपचारिकता की भरमार और खर्चे की अधिकता।

10.लोगों का हताशा में यह सोचना कि कुछ नहीं हो सकता या फिर आर्थिक कारणों या भय-भावना के कारण विधिक अदालती व्यवस्था के प्रति उत्साहित ना रहना।




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