मानवाधिकार

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एशियन सेंटर फॉर ह्यूमन राइटस् द्वारा प्रस्तुत इंडिया ह्यूमन राइटस् रिपोर्ट(२००८) के अनुसार-  (http://www.achrweb.org/reports/india/AR08/AR2008.pdf):

 

  • मध्यप्रदेश में साल २००७ में जनजातीय भूमि के लेन-देन से जुड़े २९,५९६ मामलों की सुनवाई अदालत में हुई और इसमें किसी भी मामले में अदालत ने जनजातियों के पक्ष में फैसला नहीं सुनाया। 
  • मुठभेड़ में मार गिराया शब्द का व्यवहार अक्सर गैरकानूनी तरीके से किसी को जान से मारने की घटना को छुपाने के लिए किया जाता है। सच्चाई यह है कि साल २००६ के १ अप्रैल से ३१ मार्च २००७ तक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को मुठभेड़ में मार गिराने के ३०१ मामलों की सूचना मिली। इसमें २०१ मामले सिर्फ उत्तरप्रदेश से थे जहां किसी किस्म का सशस्त्र संघर्ष नहीं चल रहा। और यह तथ्य मुठभेड़ में मारे जाने की घटनाओं की सच्चाई पर संदेह जगाता है।
  • साल २००७ में नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो ने कहा कि १३९ लोगों की मृत्यु पुलिस हिरासत में हुई। इसमें २३ लोगों की मृत्यु अदालती कार्रवाई के दौरान अथवा तहकीकात के लिए की गई यात्रा के दौरान हुई। ३८ लोगों की मत्युI अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती करवाने पर, ९ की मृत्यु भीड़ के हमले और २ की मृत्यु अपराधियों के हाथो हुई। ३१ ने आत्महत्या की, ७ भागने के क्रम में मारे गए और २९ की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई।

 



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