कुपोषण के मोर्चे पर कहां पहुंचे हम- पढ़िए, नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे के तथ्य

कुपोषण के मोर्चे पर कहां पहुंचे हम- पढ़िए, नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे के तथ्य

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published Published on Jul 24, 2017   modified Modified on Jul 24, 2017

भारत के हर सौ बच्चे में 42 बच्चे का वजन और 59 बच्चे का कद सामान्य से कम है- पांच साल पहले की हंगामा रिपोर्ट के इस तथ्य पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कुपोषण राष्ट्रीय कलंक है !

 

सवाल है कि कुपोषण के राष्ट्रीय कलंक से मुक्त होने में देश को कितनी कामयाबी मिली है ? नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे(एनएफएचएस) के नये आंकड़े जवाब जानने में आपकी कुछ मदद कर सकते हैं.

 

एनएफएचएस के नये आंकड़ों के मुताबिक बीते दस सालों में पांच साल या इससे कम उम्र के अंडरवेट(सामान्य से कम वजन) और स्टंटेड(सामान्य से कम लंबाई) बच्चों की संख्या का अनुपात कम हुआ है लेकिन वेस्टिंग(लंबाई की तुलना में ज्यादा दुबले-पतले) के शिकार बच्चों की संख्या बढ़ी है.

 

एनएफएचएस-4 के नये आंकड़ों से पता चलता है कि 2005-06 में भारत में पांच साल या इससे कम उम्र के स्टंटेड बच्चों की तादाद 48 प्रतिशत थी जो 2015-16 में कम होकर 38.4 पर पहुंची है. इस अवधि में अंटरवेट बच्चों की संख्या भी 42.5 फीसदी से घटकर 35.7 प्रतिशत हो गई है.

 

लेकिन वेस्टिंग(लंबाई की तुलना में ज्यादा दुबले) के शिकार बच्चों की संख्या के लिहाज से देखें तो आंकड़े एक अलग कहानी कहते हैं. एनएफएचएस-3 की तुलना में एनएचएफएस-4 में ऐसे बच्चों की संख्या 19.8 प्रतिशत से बढ़कर 21.0 प्रतिशत हो गई है.

 

एनएफएचएस-4 के आंकड़ों को अगर समाजिक वर्गों के हिसाब से देखें तो पता चलता है पांच साल या इससे कम उम्र के कुल बच्चों में अनुसूचित जनजाति के कुपोषित बच्चों का अनुपात तुलनात्मक रुप से ज्यादा है.

 

मिसाल के लिए पांच साल की उम्र सीमा के अंडरवेट बच्चों का अखिल भारतीय अनुपात 35.7 प्रतिशत है जबकि अनुसूचित जनजाति के परिवारों में ऐसे बच्चों की तादाद 45 प्रतिशत है. इसी तरह अनुसूचित जनजाति परिवारों में स्टटिंग के शिकार बच्चों की संख्या भी ऐसे बच्चों के अखिल भारतीय अनुपात से ज्यादा है. अनुसूचित जनजाति के परिवारों में स्टटिंग के शिकार बच्चों की तादाद 44 प्रतिशत है जबकि ऐसे बच्चों का अखिल भारतीय अनुपात 2015-16 में 38.4 प्रतिशत था.

 

अगर एनएफएचएस-4 के आंकड़ों को राज्यवार देखें तो स्टटिंग, वेस्टिंग और अंडरवेट बच्चों के मामले में बहुत ज्यादा भिन्नता नजर आती है.

 

सभी 29 राज्यों में स्टटिंग के शिकार बच्चों की संख्या में एनएफएचएस-3 की तुलना में एनएफएचएस-4 में कमी आई है.

 

2015-16 में स्टटिंग के शिकार बच्चों की सबसे ज्यादा तादाद बिहार (48.3 प्रतिशत) में पायी गई. यूपी((46.3 प्रति.), झारखंड (45.3 प्रति.), मेघालय (43.8 प्रति.), और मध्यप्रदेश (42.0 प्रति.) में भी स्टंटिंग के शिकार बच्चों की संख्या राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है.

 

केरल में स्टंटिंग के शिकार बच्चों की संख्या आनुपातिक रुप में सबसे कम (19.7 प्रति.) है. इसके बाद गोवा (20.1 प्रति.), त्रिपुरा (24.3 प्रति.), पंजाब (25.7 प्रति.), और हिमाचल प्रदेश (26.3 प्रति.) का स्थान है.

 

एनएफएचएस-4 के नये आंकड़ों से यह भी जाहिर होता है कि स्टंटिंग के शिकार बच्चों की संख्या गांवों(41.2 प्रतिशत) में ज्यादा है, शहरों में तुलनात्मक रुप से कम(31.0 प्रतिशत).

 

यूनिसेफ के मुताबिक स्टंटिंग यानी उम्र के हिसाब से कद का उचित अनुपात में ना बढ़ना कुपोषण का सूचक है. अगर किसी बच्चे को लंब समय तक पोषाहार ना मिले और बार-बार संक्रमण लगे तो वह स्टटिंग की स्थिति का सामना करता है. स्टटिंग अमूमन दो साल की उम्र में होता है इसके नकारात्मक असर उम्र भर जारी रहते हैं.

 

राज्यवार वेस्टिंग के शिकार बच्चों का अनुपात--

देश के 29 राज्यों में मात्र 12 राज्य ऐसे हैं जहां 2005-06 से 2015-16 के बीच पांच साल या इससे कम उम्र के वेस्टिंग के शिकार बच्चों की संख्या में तुलनात्मक रुप से कमी आयी है.

 

2015-16 में पांच साल तक की उम्र के वेस्टिंग के शिकार बच्चों की संख्या झारखंड में सबसे ज्यादा(29 प्रति.) थी. गुजरात (26.4 प्रति.), कर्नाटक (26.1 प्रति.), मध्यप्रदेश (25.8 प्रति.), और महाराष्ट्र (25.6 प्रति.) में भी ऐसे बच्चों की तादाद 20 प्रतिशत से ज्यादा है.

 

मिजोरम में वेस्टिंग के शिकार बच्चों की तादाद आनुपातिक रुप से सबसे कम (6.1 प्रति.) कम है. जिन राज्यों में वेस्टिंग के शिकार बच्चों की संख्या 15 फीसद से कम है उनके नाम हैं मणिपुर (6.8 प्रति.), नगालैंड (11.2 प्रति.), जम्मू-कश्मीर (12.1 प्रति.), और हिमाचल प्रदेश (13.7 प्रति.).

 

एनएफएचएस-4 के नये आंकड़ों से यह भी जाहिर होता है कि वेस्टिंग के शिकार बच्चों की संख्या ग्रामीण इलाकों (21.5 प्रति.) में शहरों(20.0 प्रति.) की तुलना में ज्यादा है.

 

यूनिसेफ के मुताबिक वेस्टिंग यानी लंबाई के अनुपात में पर्याप्त वजन का ना होना पांच साल तक उम्र के बच्चों की जीवन-अवधि कम होने का मुख्य संकेतक है. वेस्टिंग की वजह गंभीर बीमारी या भुखमरी हो सकती है.

 

राज्यवार अंडरवेट बच्चों की संख्या--

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को छोड़कर बाकी सभी 28 राज्यों में एनएफएचएस-3 की तुलना में एनएफएचएस-4 में अंडरवेट बच्चों की संख्या में कमी आई है.

 

2015-16 में झारखंड में अंडरवेट बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा (47.8 प्रति.) थी. बिहार (43.9 प्रति.), मध्यप्रदेश (42.8 प्रति.), उत्तरप्रदेश (39.5 प्रति.), और गुजरात (39.3 प्रति.) में भी अंडरवेट बच्चों की संख्या तुलनात्मक रुप से ज्यादा है.

 


मिजोरम में अंडरवेट बच्चों की संख्या का अनुपात सबसे कम (11.9 प्रति.) है. मणिपुर (13.8 प्रति.), सिक्किम (14.2 प्रति.), केरल (16.1 प्रति.) और जम्मू-कश्मीर (16.6 प्रति.) में भी अंडरवेट बच्चों की संख्या झाऱखंड की तुलना में कम से कम तीन गुणा कम है.

 

 

एनएफएचएस-4 के आंकड़ों से यह भी जाहिर होता है कि ग्रामीण इलाकों में अंडरवेट बच्चों की संख्या का अनुपात (38.3 प्रति.) शहरी इलाकों (29.1 प्रति.) की तुलना में ज्यादा है.

 

इस कथा के विस्तार के लिए कृपया निम्नलिखित लिंक्स देखें--

 

National Family Health Survey-4, http://rchiips.org/nfhs/factsheet_NFHS-4.shtml 


National Family Health Survey-4 India Fact Sheet (2015-16), please click here to read more 

   

National Family Health Survey-4 indicates a reduction in malnourished children in the country: Smt

 

Maneka Sanjay Gandhi, Press Information Bureau, Ministry of Women and Child Development, 17 March, 2017, please click here to access

 

Health Ministry releases results from 1st phase of NFHS-4 survey, Press Information Bureau/ Ministry of Health and Family Welfare, 19 January, 2016, please click here to access  


One-third Of West Bengal Kids Stunted & Underweight, Says NFHS-4, News alert from Inclusive Media for Change, 21 January, 2016, please click here to access 

 

IFPRI Report Shows Under-nutrition Has Fallen, News alert from Inclusive Media for Change, 21 September, 2015, please click here to access 


Govt. shows laxity in battle against malnutrition, News alert from Inclusive Media for Change, 8 June, 2015, please click here to access  


Doubts Over Maharashtra's Nutritional Progress?, News alert from Inclusive Media for Change, 26 January, 2015, please click here to access 


Child Malnutrition Declining, Though Not Fast Enough, News alert from Inclusive Media for Change, 21 November, 2014, please click here to access   


Trends of undernutrition in children under 5 years of age, Inclusive Media for Change, May, 2015, please click here to access 


Note on under-nutrition among children in developing countries, UNICEF, please click here to access  

Delhi And Other Indian Cities Have Child Malnutrition Levels Akin To Sub-Saharan Africa -Rukmini S, HuffingtonPost.in, 14 April, 2017, please click here to access   

 

पोस्ट में इस्तेमाल की गई तस्वीर साभार-- बंसल न्यूज http://bansalnews.com/PhotoStory.aspx?id=139739&photoid=29288&Pageid=112



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