भारत में बाल-मजदूरों की तादाद 3 करोड़ से ज्यादा - सेव द चिल्ड्रेन की नई रिपोर्ट

भारत में बाल-मजदूरों की तादाद 3 करोड़ से ज्यादा - सेव द चिल्ड्रेन की नई रिपोर्ट

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published Published on Jul 21, 2017   modified Modified on Jul 21, 2017

क्या आप जानते हैं कि यंगिस्तान यानी नौजवानों का देश कहलावाने वाले भारत में बच्चों की दशा कैसी है ? नीचे लिखे तथ्यों को ध्यान से पढ़िए और खुद ही फैसला कीजिए.

 

बच्चों में कुपोषण का एक पैमाना है स्टटिंग और भारत में स्टटिंग के शिकार बच्चों की संख्या 4 करोड़ 80 लाख से अधिक है. यह दक्षिण अमेरिका के देश कोलंबिया की कुल आबादी(4 करोड़ 90 लाख) के बराबर है.

 

लगभग इतनी ही संख्या में भारत की किशोर उम्र आबादी स्कूली शिक्षा से वंचित है. जी हां, उच्च माध्यमिक शिक्षा हासिल करने की उम्र को पहुंचे 4 करोड़ 70 लाख किशोर स्कूली शिक्षा से वंचित हैं.

 

और अगर आप सोच रहे हैं कि कुपोषण के शिकार तथा पढ़ाई से वंचित यह बड़ी तादाद अपना जीवन किस तरह गुजारती है तो अनुमान के लिए इस तथ्य पर गौर कीजिए कि भारत में बाल-मजदूरों की संख्या 3 करोड़ 10 लाख है, यह तादाद दुनिया में किसी भी देश के बाल-मजदूरों की संख्या से ज्यादा है.

 

ये तथ्य वंचित बच्चों के लिए विश्वस्तर पर काम करने वाली स्वयंसेवी संस्था सेव द चिल्ड्रेन की नई रिपोर्ट स्टोलेन चाइल्डहुड से लिए गए हैं. बाल-मजदूरी, बाल-विवाह, शिक्षा और कुपोषण के लिहाज से देखें तो रिपोर्ट के तथ्य भारत की बड़ी चिन्ताजनक तस्वीर पेश करते हैं.

 

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में स्टटिंग के शिकार बच्चों की संख्या 48.2 मिलियन है और 31 मिलियन बच्चे भारत की श्रम-शक्ति में बाल-मजदूर के रुप में शामिल हैं. इन दो बड़ी वजहों तथा स्कूल वंचित किशोरो की संख्या के कारण रिपोर्ट में भारत को बचपन पर छाये संकट को दर्शाने वाले एक इंडेक्स में 172 देशों के बीच 116 वें स्थान पर रखा गया है.

 

रिपोर्ट में भारत के तीन पड़ोसी देश श्रीलंका, भूटान और म्यांमार बचपन पर खतरे को दर्शाने वाले इंडेक्स में तुलनात्मक रुप से बेहतर स्थिति में हैं. श्रीलंका को रिपोर्ट के इंडेक्स में 61वें स्थान पर रखा गया है, भूटान को 93वें स्थान पर जबकि म्यांमार 112वें स्थान पर है. नेपाल (134वां). बांग्लादेश(134) तथा पाकिस्तान(148) भारत तुलनात्मक रुप से पीछे हैं.

 

स्टोलेन चाइल्डहुड रिपोर्ट में बच्चों की दशा का सूचकांक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण संकेतों को आधार बनाया गया है. इसमें प्रमुख हैं- पांच साल या इससे कम उम्र के बच्चों की मृत्यु, बच्चों में व्याप्त कुपोषण और स्टटिंग, शिक्षा का अभाव, बाल-मजदूरी, कम उम्र में विवाह और संतान का जन्म तथा संघर्ष की स्थिति के कारण परिवारों का पलायन.

 

रिपोर्ट के कुछ महत्वपूर्ण तथ्य--

भारत में स्टटिंग के शिकार बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है - स्टोलेन चाइल्डहुड रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पांच साल या इससे कम उम्र के स्टटिंग के शिकार बच्चों की संख्या 48 मिलियन है. यह पांच साल या इससे कम उम्र के कुल बच्चों की संख्या का 39 फीसद है जबकि इस उम्र के स्टटिंग के शिकार बच्चों की वैश्विक संख्या 156 मिलियन है यानी तकरीबन 25 फीसद.

 

एक खास उम्र में बच्चे की लंबाई मानक से कम हो तो उसे स्टटिंग का शिकार माना जाता है. इसे कुपोषण की दशा का अनुमान किया जाता है. अगर बच्चा शुरुआती गर्भावस्था से लेकर 2 साल की उम्र तक कुपोषण की गंभीर स्थिति में रहे तो उसके शरीर और दिमाग का विकास पर्याप्त नहीं हो पाता. रिपोर्ट के मुताबिक स्टटिंग की अवस्था ताउम्र जारी रहती है, इसकी भरपायी नहीं हो सकती और स्टटिंग के शिकार बच्चों को शिक्षा और रोजगार के अवसर हासिल करने के मामले में अन्य बच्चों की तुलना में अभाव का सामना करना पड़ता है.

 

हाईस्कूली शिक्षा की उम्र के 47 मिलियन बच्चे पढ़ाई से वंचित हैं-स्टोलेन चाइल्डहुड रिपोर्ट के मुताबिक भारत में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की शिक्षा की उम्र के 18.6 फीसद बच्चे स्कूल-वंचित हैं. इसी तरह उच्च माध्यमिक शिक्षा की उम्र हासिल कर चुके 4 करोड़ 70 लाख बच्चों का दाखिला स्कूल में नहीं है या उन्होंने किन्हीं कारणों से स्कूल जाना छोड़ दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कि स्कूल वंचित ये बच्चे अपने शेष साथियों की तुलना में जीवन-काल में कम आय अर्जित कर पायेंगे जो देश की जीडीपी का 0.3 फीसद से लेकर 15.2 फीसद तक हो सकता है.

 

10 करोड़ से ज्यादा है ऐसी लड़कियां जिनका ब्याह 18 साल से कम उम्र में हुआ-रिपोर्ट के 15-19 साल की उम्र में ब्याह दी गई लड़कियों की तादाद भारत में 21.1 प्रतिशत है. भारत में 10.3 शादीशुदा लड़कियां ऐसी हैं जिनका ब्याह 18 साल की उम्र पूरी होने से पहले कर दिया गया. स्टोलेन चाइल्डहुड रिपोर्ट के मुताबिक कम उम्र में विवाह के नतीजे लड़कियों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिहाज से घातक होते हैं. कम उम्र में विवाहित लड़की सेहत, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े अपने अधिकारों को समुचित रुप से हासिल नहीं कर पाती. उन्हें गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के दौरान गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ता है.

 

रिपोर्ट के मुताबिक कम उम्र में ब्याह दी गईं प्रत्येक 1000 लड़कियों में 23.3 लड़कियां 15-19 साल में मां बन जाती हैं, अगर यही लड़कियां 20 साल या उससे ज्यादा उम्र में मां बनें तो रिपोर्ट के मुताबिक उनकी आर्थिक उत्पादकता 49600 करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है.

(इस पोस्ट में इस्तेमाल की गई तस्वीर साभार- डाऊन टू अर्थ/विकास चौधरी http://www.downtoearth.org.in/news/childhood-stunting-affects-future-success-in-life-say-experts-54045 



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