भुखमरी: क्या 2014 के ग्लोबल हंगर रिपोर्ट से तुलना जायज है ?

भुखमरी: क्या 2014 के ग्लोबल हंगर रिपोर्ट से तुलना जायज है ?

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published Published on Oct 23, 2017   modified Modified on Oct 23, 2017
साल 2014 में वैश्विक भुखमरी सूचकांक(ग्लोबल हंगर इंडेक्स) के पैमाने पर भारत का स्थान 55 वां था जबकि इस साल भारत 100 वें स्थान पर है. 2014 में भारत का जीएचआई अंकमान 17.8 था और इस साल का अंकमान 31.4 है.


तो क्या महज तीन सालों के भीतर देश में भुखमरी की हालत इतनी संगीन हो गई है कि भारत का दर्जा 100 से ज्यादा देशों के बीच 45 पादान नीचे खिसक आया है?


सवाल का उत्तर जानने से पहले आईए जानते हैं कि इस साल की नई रिपोर्ट में दरअसल कहा क्या गया है.


भारत में भुखमरी की स्थिति को ‘गंभीर' करार देते हुए एक नई रिपोर्ट में भारत को वैश्विक भुखमरी सूचकांक(ग्लोबल हंगर इंडेक्स) के लिहाज से 119 देशों के बीच 100 वें स्थान पर रखा गया है.


इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएफपीआरआई) की नई रिपोर्ट 2017 ग्लोबल हंगर इंडेक्स- द इन्क्विलिटिज ऑफ हंगर में वैश्विक भुखमरी सूचकांक के पैमाने पर भारत का अंकमान(जीएचआई स्कोर) 31.4 है. यह एशिया में अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान को छोड़कर बाकी सब देशों से ज्यादा है.


रिपोर्ट में भारत के पड़ोसी देश चीन को अंकमान 7.5 के साथ 29 वें स्थान पर रखा गया है जबकि नेपाल को अंकमान 22 के साथ 72 वें स्थान पर.


भुखमरी के मामले में म्यांमार ( अंकमान 22.6, स्थान 77वां ), श्रीलंका ( अंकमान : 25.5; स्थान 84 वां) और बांग्लादेश (अंकमान 26.5; स्थान 88 वां) की स्थिति भारत से बेहतर है.


रिपोर्ट में पाकिस्तान को अंकमान 32.6 के साथ 106 वें स्थान पर ऱखा गया है जबकि अफगानिस्तान को 33.3 अंकों के साथ 107 वें स्थान पर और रिपोर्ट के मुताबिक एशिया के इन दो देशों की स्थिति भुखमरी के मामले में भारत से ज्यादा कहीं ज्यादा संगीन है.


पिछले साल 118 देशों के बीच वैश्विक भुखमरी सूचकांक के पैमाने पर भारत को 28.5 अंकों के साथ 97वें स्थान पर रखा गया था


पिछले साल के ग्लोबल हंगर रिपोर्ट में कहा गया था कि साल 2000 से भारत के जीएचआई अंकमान में तकरीबन एक चौथाई की कमी आयी है लेकिन 2030 तक भुखमरी को मिटाने के संयुक्त राष्ट्र संघ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को गंभीर प्रयास करने होंगे.


गौरतलब है कि आपीएफआरआई वैश्विक भुखमरी सूचकांक के पैमाने पर जिस देश को जितने अंक हासिल होते हैं उनकी स्थिति उतनी ही बेहतर मानी जाती है. पैमाना 0 से 100 अंकों का है और इसमें मुख्य रुप से चार बातों के आधार पर देशों को अंक दिए जाते हैं और उनके दर्जे का निर्धारण किया जाता है.


देशों को अंकमान देने के लिए देखा जाता है कि 1. आबादी में कुपोषित लोगों का अनुपात कितना है, (2) अनुपात के लिहाज से पांच साल तक की उम्र के कितने बच्चे वेस्टिंग (यानि लंबाई के अनुपात में कम वजन) के शिकार हैं, (3) अनुपात क हिसाब से कितने पांच साल तक की उम्र के कितने बच्चे स्टंटिंग( उम्र के लिहाज से कम लंबाई) के शिकार हैं, और (4) पांच साल तक की उम्र के बच्चों में मृत्यु दर कितनी है.


आईएफपीआरआई की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत का अंकमान ऊंचा होना एक परेशान करने वाली सच्चाई का संकेत करता है कि भारत में कुपोषित बच्चों की तादाद बहुत ज्यादा है और ज्यादा आबादी वाला देश होने के कारण पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में भुखमरी की स्थिति भारत के कारण संगान बनी हुई है.

 

रिपोर्ट के अनुसार भारत में पांच साल तक की उम्र के तकरीबन 21 फीसद बच्चे वेस्टिंग के शिकार हैं जबकि इस उम्र के एक तिहाई बच्चे स्टंटिंग से ग्रस्त हैं. इस साल के ग्लोबल हंगर इंडेक्स में सिर्फ जिबूती, श्रीलंका और दक्षिणी सूडान ही ऐसे देश हैं जहां 20 फीसद से ज्यादा बच्चे वेस्टिंग के शिकार हैं. रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने बच्चों की वेस्टिंग की समस्या के निदान में बीते 25 सालों में खास प्रगति हासिल नहीं की है.


स्टंटिंग की समस्या को कम करने में भारत को बेशक कामयाबी मिली है . रिपोर्ट के मुताबिक साल 2000 से 2015-16 के बीच भारत में स्टंटिंग की दर में 29 फीसद की कमी आयी है लेकिन कम होने के बावजूद यह दर अब भी काफी ऊंची(38.4 प्रतिशत) है.


आईएफपीआरआई का स्पष्टीकरण

आईएफपीआरआई ने स्पष्ट किया है कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स के लिहाज से भारत की स्थिति में आयी गिरावट की तस्वीर को बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं किया जाना चाहिए. बेशक पिछले साल के 97 वें स्थान के मुकाबले इस साल भारत 100 वें स्थान पर है लेकिन जीएचआई अंकमान का विश्लेषण ठीक तरीके से होना चाहिए.


आईएफपीआरआई द्वारा जारी स्पष्टीकरण के मुताबिक 2014 में भारत का जीएचआई अंकमान 17.8 था और भारत को भुखमरी के हालात के लिहाज से 55 वें स्थान पर रखा गया था लेकिन 2014 के अंकमान और दर्जे की तुलना 2017 के अंकमान और दर्जे से नहीं की जा सकती क्योंकि ग्लोबर हंगर इंडेक्स के अंकमान मौजूदा और ऐतिहासिक दोनों ही तरह के आंकड़ों पर आधारित होते हैं और इन आंकड़ों को ज्यादा से ज्यादा दुरुस्त बनाने के लिए उनमें लगातार सुधार किए जाते हैं.


स्पष्टीकरण के मुताबिक दूसरी बात यह है कि 2014 की ग्लोबल हंगर रिपोर्ट में 5 से कम अंकमान वाले देशों को दर्जा तय करने वाली सूची में शामिल नहीं किया गया था. इस तरह 2014 की ग्लोबल हंगर रिपोर्ट में भारत से कम अंकमान वाले कुल 44 देश दर्जा तय करने वाली सूची से बाहर रखे गये थे.अगर इन देशों को शामिल किया जाता तो भारत का स्थान ग्लोबल हंगर इंडेक्स के पैमाने पर 55 के बजाय 2014 में 99 वां होता.


आईएफपीआरआई के स्पष्टीकरण के मुताबिक पुराने जीएचआई स्कोर से इस साल के जीएचआई स्कोर की तुलना करके किसी देश में भुखमरी की स्थिति का आकलन करना इसलिए भी ठीक नहीं है क्योंकि आंकड़ों की उपलब्धता को देखते हुए हर साल अलग-अलग देश सूची में शामिल किए जाते हैं और इसलिए साल दर साल के लिहाज से देशों के बीच तुलनात्मक आकलन करना ठीक नहीं होगा.

(पोस्ट में इस्तेमाल की गई तस्वीर साभार प्रभासाक्षी के इस लिंक से http://www.prabhasakshi.com/news/currentaffairs/story/23556.html 



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