मातृ मृत्यु को कम करने का लक्ष्य अभी दूर है

मातृ मृत्यु को कम करने का लक्ष्य अभी दूर है

Share this article Share this article
published Published on Dec 18, 2019   modified Modified on Dec 19, 2019

 भारत में मातृ मृत्यु को कम करने का लक्ष्य अब भी बहुत दूर है। उच्च मातृ मृत्यु अनुपात महिलाओं की खराब प्रसव स्वास्थ्य सुविधाओं के अलावा समाज में उनकी भयावह स्थिति को भी दर्शाता है। सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के ताजा जारी आंकडे बताते हैं कि मातृ मृत्यु अनुपात में तेजी से गिरावट आई है। मातृ मृत्यु अनुपात जहां साल 1997-98 में 398.0 था, वहीं वर्ष 2015-17 में ये आंकड़ा 122.0 हो गया है, जोकि -69.3 प्रतिशत कम हुआ है।

 

 तालिका एक दर्शाती है कि भारत का मातृ मृत्यु अनुपात वर्ष 1997-98 में 398.0, वर्ष 1999-01 में 327.0, वर्ष 2001-03 में 301.0, वर्ष 2004-06 में 254.0 , वर्ष 2007-09 में 212.0, 2010-12 में 178.0, वर्ष 2011-13 में 167.0, वर्ष 2014-16 में 130.0, और वर्ष 2015-17 में 122,0 था। हालांकि यूनाइटेड नेशन सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (SDGs) के अनुसार देश में वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु अनुपात को प्रति लाख नवजात शिशुओं के जन्म पर 70 मातृ मृत्यु से भी नीचे लाने की जरूरत है।

 

 वर्ष 2015-17 के दौरान सबसे कम मातृ मृत्यु अनुपात 42.0 रहा, जोकि केरल में दर्ज किया गया। उसके बाद महाराष्ट्र में 55.0 और तमिलनाडु में 63.0 दर्ज किया गया। असम में मातृ मृत्यु सबसे ज्यादा 229.0 था और उसके बाद उत्तरप्रदेश में 216.0 और मध्यप्रदेश में 188.0 दर्ज किया गया।

 

हालांकि वर्ष 2014-16 और वर्ष 2015-17 के बीच भारत में मातृ मृत्यु अनुपात में -6.2 प्रतिशत कम हुआ है। और यह वर्ष 2011-13 और वर्ष 2014-16 के बीच -22 प्रतिशत तक नीचे गया। (यानी औसतन सालाना -7.4 प्रतिशत नीचे गिरा है।).

 

यह गौरतलब है कि वर्ष 1997-98 से सरकार ने अविभाजित बिहार और झारखंड व अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के मातृ मृत्यु अनुपात के आंकड़े एक साथ दर्ज किए हैं। इसी प्रकार, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के आंकड़े भी एक साथ दर्ज किए हैं। हालांकि वर्ष 2015-17 में इन राज्यों के अलग-अलग मातृ मृत्यु अनुपात के आंकड़े दिए गए हैं। इसीलिए, इन राज्यों में मातृ मृत्यु अनुपात के ताजा आंकड़ों से पुराने आंकड़ों की तुलना कर पाना संभव नहीं है।

 

तालिका एक दर्शाती है कि केरल में वर्ष मातृ मृत्यु अनुपात 1997-98 और मातृ मृत्यु अनुपात 2015-17 के आंकड़ों में -72 प्रतिशत की कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य द्वारा दी गईं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, प्रसव के दौरान बेहतर देखभाल और गर्भवती महिलाओं को अच्छा पौष्टिक आहार मिलने की वजह से केरल के मातृ मृत्यु अनुपात में सुधार हुआ है।

 

इसी प्रकार, पश्चिम बंगाल में वर्ष 1997-98 और वर्ष 2015-17 के बीच मातृ मृत्यु अनुपात का आंकड़ा 303.0 से गिरकर 94.0 तक पहुंच गया है।

 

तालिका 1: मातृ मृत्यु अनुपात, भारत और बड़े राज्य, 1997-1998 से 2015-17 

 स्रोत: सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम, रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त, भारत के कार्यालय, देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें

 

एसआरएस (SRS) के मुताबिक मातृ मृत्यु अनुपात में प्रति वर्ष प्रति 100,000 में उन महिलाओं का भी हवाला दिया गया है, जिनकी मौत गर्भावस्था की जटिलताओं व प्रसव के दौरान हुई है।   

 

तालिका एक को देखने से पता चलता है कि लगभग सभी वर्षों में, सभी दक्षिण भारत के राज्य (आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु) में मातृ मृत्यु अनुपात कम रहा है, विशेषकर उन 8 राज्यों की तुलना में जिन्हें एमपावरर्ड एक्शन ग्रुप (EAG) राज्य (बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, राजस्थान) कहा जाता है और असम को भी इसमें जोड़ा जा सकता है।

 

ईएजी (EAG) स्टेट और असम में वर्ष 2014- 15 और 2015-17 के बीच मातृ मृत्यु अनुपात में सबसे ज्यादा सार्थक कमी दर्ज की गई। इस बीच यह आंकड़ा 188 से गिरकर 177 पहुंच गया। (यानी -6.9 प्रतिशत)। दक्षिणी राज्यों में इस अवधि में यह आंकड़ा 77 से गिरकर 72 तक पहुंचा है। य़ानी (-6.5 प्रतिशत)। अन्य राज्यों में यह आंकड़ा 93 से गिरकर 90 तक पहुंच गया। यानी (-3.2 प्रतिशत)

 

अगर हम राज्यों के समूहों के मातृ मृत्यु अनुपात को वर्ष 1999-2001 के बाद से देखें तो सबसे उच्च मातृ मृत्यु अनुपात EAG व असम राज्य में और उसके बाद अन्य राज्यों (इसमें गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्य शामिल हैं) में और उससे कम दक्षिणी राज्यों में है।

 

ट्रेंड इन मेटरनल मोरटिलिटी 2000-2017 नामक एक अन्तरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने पाया है कि नाइजीरिया और भारत में सबसे ज्यादा अनुमानित संख्या में मातृ मृत्यु होती हैं, जोकि वर्ष 2017 में विश्व मातृ मृत्यु में कुल मौतों का लगभग एक तिहाई (35 प्रतिशत) था। इन दोनों देशों में क्रमशः लगभग 67,000 और 35,000 मातृ मृत्यु दर्ज की गईं। यानी (कुल विश्व मातृ मृत्यु मौतों में 23 प्रतिशत और 12 प्रतिशत)।

 

यह रिपोर्ट बताती है कि मॉडल्ड एस्टिमेट के अनुसार, देश का मातृ मृत्यु अनुपात वर्ष 2000 में 370, वर्ष 2005 में 286, वर्ष 2010 में 210, वर्ष 2015 में 158 और वर्ष 2017 में 145 था।

 

यहां यह उल्लेखनीय है कि एसआरएस (SRS) देश का सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय नमूना सर्वेक्षण (सैम्पल सर्वे) है, जिसे भारत के गृह मंत्रालय के रजिस्टार जनरल कार्यालय द्वारा करवाया जाता है।

 

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 6 जून को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि मातृ मृत्यु अनुपात के मामले में खराब प्रदर्शन वाले राज्यों में मिशन इंद्रधनुष और गहन मिशन इंद्रधनुष की पहल से इसमें कमी आएगी। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत् बुनियादी ढांचा संवर्धन व मानव संसाधन, क्षमता संवर्धन और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, जिनके तहत गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली मुफ्त यातायात सुविधा और देखभाल से मातृ मृत्यु अनुपात में कमी आएगी।

 

ताजा जारी बुलेटिन में कहा गया है कि शव परीक्षण उपकरण भी होंगे जो नियमित रूप से मौतों को रिपोर्ट करेंगे, जिनसे विशेष कारणों समेत मातृ मृत्यु का आंकड़ा तैयार होगा।

 

मेसर इवोल्यूशन नामक वेबसाइट के अनुसार गर्भपात से संबंधित मौतों, दिमागी सदमे की समस्याओं और चिकित्सा विशेषज्ञों के अभाव इत्यादि जैसे विशेष कारकों के अलावा भी जनसंख्या के आधार पर मातृ मृत्यु की जांच करना कठिन है। यदि काफी बड़ी आबादी चिकित्सा सुविधाओं का इस्तेमाल नहीं कर पाती है तो मातृ मृत्यु अनुपात के आंकड़ों पर बहुत भरोसा नहीं किया जा सकता।

 

सटीक उपायों के बावजूद, मातृ मृत्यु अनुपात के आंकड़े मोटे तौर पर मातृ मृत्यु की स्थिति को बताते हैं, क्योंकि अधिकतर मापने के तरीकों की सीमाएं हैं। इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए कृपया इसे देखें-

 

मातृ मृत्यु दर

 

एसआरएस (SRS) के मुताबिक मातृ मृत्यु दर (MMR) को 15-49 आयु वर्ग की प्रति लाख महिलाओं में नवजात शिशुओं को जन्म देने पर होने वाली मातृ मृत्यु की संख्या के रूप में परिभाषित किया गया है।

 

तालिका दो बताती है कि भारत में मातृ मृत्यु दर वर्ष 2011-13 में 11.7 थी, जो गिरकर 2014-16 को 8.8 तक और वर्ष 2015-17 में 8.1 तक पहुंच गई।

 

तालिका 2: मातृ मृत्यु दर, भारत और बड़े राज्य, 2011-13 से 2015-17 

 

स्रोत: सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम, रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त, भारत के कार्यालय, देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें

 

केरल में वर्ष 2015-17 में सबसे कम मातृ मृत्यु दर (1.9) थी, उसके बाद महाराष्ट्र में (3.3) और आंध्रप्रदेश में (3.6) थी। सबसे ज्यादा मातृ मृत्यु दर उत्तरप्रदेश में (20.1) और उसके बाद मध्यप्रदेश में 17.5 और उससे थोड़ा कम बिहार (16.9) दर्ज की गई।

 

दक्षिणी राज्यों में मातृ मृत्यु दर सार्थक रूप से सबसे ज्यादा कम हुई है। दक्षिणी राज्यों में यह वर्ष 2014-16 और वर्ष 2015-16 के बीच 4.7 से गिरकर 4.2 तक पहुंच गई है। (यानी -10 प्रतिशत)। ईएजी और असम में इस अवधि में 16.0 से गिरकर 14.4 दर्ज की गई है। (-8.8 प्रतिशत) और अन्य राज्यों में यह 5.4 से 5.1 दर्ज की गई। (यानी -5.6 प्रतिशत)।

 

अगर हम उच्च मातृ मृत्यु दर को राज्यों के समूहों के क्रम में देखें तो वर्ष 2011-13, वर्ष 2014-16 और वर्ष 2015-17 में ईएजी और असम वाले राज्य समूहों में सबसे ज्यादा मातृ मृत्यु दर दर्ज की गई है। (जिसमें असम, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं)। इसके बाद अन्य राज्यों में ( गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्य) और सबसे आखिर में यानी सबसे कम मातृ मृत्यु दर दक्षिणी राज्यों में रही हैं( जिसमें आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं)।

 

मातृ मृत्यु अनुपात और मातृ मृत्यु दर में क्या अंतर है?

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रति लाख नवजातों पर होने वाली मातृ मृत्यु की संख्या मातृ मृत्यु अनुपात कहलाती है, जैसा कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की मौत के खतरे को मापने का पैमाना है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं एक गांव है जिसकी आबादी 1000 है। 20 महिलाएं गर्भवती हैं। 5 शिशु का गर्भपात हो गया। 15 महिलाओं ने नवजात शिशुओं को जन्म दिया। 5 महिलाओं की प्रसव के दौरान मौत हो जाती है। इस मामले में 15 नवजात शिशुओं के जन्म के दौरान 5 मातृ मृत्यु हुई, जो 33.3 प्रतिशत है।

 

मातृ मृत्यु अनुपात के उलट मातृ मृत्यु दर, 15-49 आयु वर्ग की महिलाओं में प्रति लाख नवजात शिशुओं को जन्म देने पर होने वाली मातृ मृत्यु की संख्या है। इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है कि जैसे एक गांव में 1000 की आबादी है। वहां 500 महिलाएं हैं। इनमें से 400 प्रजनन आयु समूह की हैं। पिछले साल 15 महिलाओं ने 15 जीवित शिशु को जन्म दिया। इनमें से 5 महिलाओं की गर्भावस्था के दौरान मौत हो गई। तब मातृ मृत्यु दर, 400 प्रजनन आयु समूह की महिलाओं में से 5 की मातृ मृत्यु हुई, जो 1.25 प्रतिशत हुई।  

 

References

Special Bulletin on Maternal Mortality in India 2015-17, released in November, 2019, Sample Registration System, Office of the Registrar General, India, please click here to access

Trends in Maternal Mortality 2000 to 2017: Estimates by WHO, UNICEF, World Bank Groups and the United Nations Population Division, released in September 2019, World Halth Orgnization (WHO), United Nations Children's Fund (UNICEF), World Bank Groups, United Nations Population Fund (UNFPA) and the United Nations Population Division, please click here to access 

Special Bulletin on Maternal Mortality in India 2014-16, released in May, 2018, Sample Registration System, Office of the Registrar General, India, please click here to access 

Special Bulletin on Maternal Mortality in India 2011-13, Sample Registration System, Office of the Registrar General, India, please click here to access 

Compendium of India's Fertility and Mortality Indicators, 1971-2013, Sample Registration System, Office of the Registrar General, India, please click here and here to access 

Sample Registration System, Office of the Registrar General & Census Commissioner, India, please click here to access

A Presentation on Maternal Mortality Levels (2010-12), please click here to access

Maternal mortality ratio (MMR), Family Planning and Reproductive Health Indicators Database, please click here to access

India shows impressive gains in reduction of Maternal Mortality with 22% reduction since 2013, Press Information Bureau, Ministry of Health and Family Welfare, dated 6 June, 2018, please click here to access    

Shri JP Nadda highlights the achievements of the Health Ministry, Press Information Bureau, Ministry of Health and Family Welfare, dated 11 June 2018 please click here to access 

Monitoring Health in the Sustainable Development Goals: 2017, World Health Organization, Regional Office for South East Asia, as quoted in the National Health Profile 2018, page no. 288, please click here to access 

Maternal mortality ratio is falling but more effort required to catch up with China, News alert by Inclusive Media for Change dated 12 June, 2018, please click here to access 

The drop in the maternal mortality ratio is just the first step, The Telegraph, 18 November, 2019, please click here to access

Explained -- Maternal mortality rate in the states: Assam 229, Kerala 42, The Indian Express, 9 November, 2019, please click here to access 

India losing fewer mothers to childbirth, data reveal, The Hindu Business Line, 8 November, 2019, please click here to access 

Maternal death rate declining: report -Afshan Yasmeen, The Hindu, 8 November, 2019, please click here to access

Kerala's maternal mortality rate drops to 46, govt aims 30 by 2020 -Vishnu Varma, The Indian Express, 7 June, 2018, please click here to access 


Image Courtesy: UNDP India 

   



Related Articles

 

Write Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later

Contact Form

Please enter security code
      Close