खदानों में काम करने वाले श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य की बात

खदानों में काम करने वाले श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य की बात

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published Published on Oct 10, 2020   modified Modified on Oct 10, 2020

इस साल (31 अगस्त तक) देश के विभिन्न कोयला खदानों में लगभग 24 जानलेवा दुर्घटनाएँ और 47 गंभीर दुर्घटनाएँ हुई हैं. इसी तरह, 18 जानलेवा दुर्घटनाएँ और 13 गंभीर दुर्घटनाएँ गैर-कोयला खदानों में इस समय अवधि में हुई हैं. कोविड-19 के चलते आई आर्थिक मंदी के कारण इन खदानों में कम मांग और उत्पादन की आपूर्ति-श्रृंखला में व्यवधान के कारण पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष दुर्घटना के आंकड़े कम हैं. इसके अलावा, इस वर्ष के दुर्घटना के आंकड़े केवल 31 अगस्त तक के उपलब्ध हैं.

यह गौरतलब है कि 25 मार्च, 2020 से लागू किए गए लॉकडाउन की जद से कोयला और खनिज उत्पादन मुक्त था. गृह मंत्रालय (MoHA) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के खंड 5 में 24 मार्च, 2020 को विभिन्न मंत्रालयों द्वारा किए जाने वाले उपायों के बारे में बताया गया था. देश में COVID-19 महामारी के समाधान के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों (संघ शासित प्रदेशों) के विभागों ने उल्लेख किया कि अपवादों के साथ औद्योगिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे. क) आवश्यक वस्तुओं की विनिर्माण इकाइयाँ; और ख) राज्य सरकार से आवश्यक अनुमति प्राप्त करने के बाद उत्पादन इकाइयां जिनकी निरंतर प्रक्रिया की आवश्यकता होती है. हालांकि, 25 मार्च, 2020 को दिशानिर्देशों का एक परिशिष्ट जारी किया गया था जिसमें कहा गया था कि खनन क्षेत्र और इससे संबंधित क्षेत्रों को लॉकडाउन में छूट दी जाएगी.

यद्यपि सरकार ने खदानों और खतरनाक कारखदानों में श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई विशिष्ट योजना नहीं बनाई है, आम तौर पर खदान और कारखदानों के श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए, खतरनाक अधिनियम सहित खदान अधिनियम 1952 और फैक्ट्रीज एक्ट, 1948 और उनके तहत बनाए गए नियम और कानून में निहित प्रावधानों के अनुसार संचालित होते हैं, खान अधिनियम, 1952 के प्रावधानों और खदानों में कार्यरत व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए बाद में बनाए गए नियमों और विनियमों के बावजूद, दोनों कोयला और गैर-कोयला खदानों में घातक और गंभीर दुर्घटनाएं होती रहती हैं.

अतारांकित प्रश्न संख्या 1156 (19 सितंबर, 2020 लोकसभा) का जवाब देते हुए, श्रम और रोजगार राज्य मंत्री श्री संतोष कुमार गंगवार ने खुलासा किया कि 2015 से 2020 के बीच (31 अगस्त तक), कोयला खदानों में लगभग 304 जानलेवा दुर्घटनाएं और 1,333 गंभीर दुर्घटनाएँ हुई थीं. संसद में पूछे गए सवाल के उनके जवाब ने यह भी संकेत दिया कि 2015 और 2020 (31 अगस्त तक) के बीच, गैर-कोयला खदानों में लगभग 242 जानलेवा दुर्घटनाएं और 187 गंभीर दुर्घटनाएं हुई थीं. कृपया विवरण के लिए चार्ट -1 देखें.

स्रोत: 19 सितंबर, 2020 को लोकसभा में अतारांकित प्रश्न संय 1156 का श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा दिया गया उत्तर, देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

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गंभीर दुर्घटनाओं की संख्या के अलावा जानलेवा दुर्घटनाओं और मौतों और गंभीर दुर्घटनाओं के कारण होने वाले घायलों की संख्या पर राज्य-वार डेटा भी उपलब्ध है. राज्य-वार आंकड़े कोयला खदानों और गैर-कोयला खदानों यानी धातु और तेल खदानों दोनों के लिए उपलब्ध हैं.

कोयला खदानों के लिए उपलब्ध नवीनतम आंकड़े दर्शाते हैं कि साल 2020 (31 अगस्त तक) में छत्तीसगढ़ (7) ओडिशा और तेलंगाना (5 प्रत्येक) और झारखंड (3) में जानलेवा दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतें सबसे अधिक थीं. साल 2020 (31 अगस्त तक) में कोयला खदानों में दुर्घटनाओं के कारण गंभीर रुप से घायल तेलंगाना (24) में सबसे अधिक थे, इसके बाद झारखंड (9) और पश्चिम बंगाल (6) में खदान दुर्घटनाओं में घायल हुए. चूंकि डेटा आधिकारिक है, इसलिए यह बहुत संभव है कि अवैध कोयला खदानों में दुर्घटनाओं, मौतों और घायलों पर ध्यान नहीं दिया गया हो.

गैर-कोयला खदानों (यानी धातु और तेल) के आंकड़े दर्शाते हैं कि 2020 के दौरान (31 अगस्त तक) जानलेवा दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतें राजस्थान और उत्तर प्रदेश (5 प्रत्येक) में सबसे अधिक थीं, इसके बाद आंध्र प्रदेश (3) और असम, केरल, महाराष्ट्र और ओडिशा (2) में मौतें हुईं. 2020 के दौरान (31 अगस्त तक) गैर-कोयला खानों में दुर्घटनाओं के कारण गंभीर रूप से घायलों की संख्या राजस्थान (4) में सबसे अधिक थी, इसके बाद आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश (2 प्रत्येक) थे. चूंकि डेटा आधिकारिक है, इसलिए यह बहुत संभव है कि गैर-कोयला खदानों में दुर्घटनाओं, मौतों और चोटों की गणना नहीं की गई है.

व्यावसायिक स्वास्थ्य और खान श्रमिकों की सुरक्षा

अतारांकित प्रश्न संख्या 620 (16 सितंबर, 2020 को लोकसभा में उठाए गए प्रश्न) का जवाब देते हुए, संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री श्री फहलद जोशी ने कहा कि विभिन्न कारणों के चलते कोयला खदान में काम करना गैर-कोयला खानों की तुलना में ज्यादा जोखिम भरा है (दुर्घटनाओं की संख्या के संदर्भ में), 

1. भूमिगत कोयला खनन अधिक खतरनाक है और गैर-कोयला खानों व खुले में बनी खदानों की तुलना में भूमिगत खदान में भू-खनन की स्थिति पूरी तरह से अलग है. गैर-कोयला खदानें ज्यादातर खुले में होती हैं.

2. कोयले के उत्पादन की मात्रा और अधिक मांग को पूरा करने के लिए भूमिगत कोयला खानों में मशीनरी का इस्तेमाल गैर कोयला खानों की तुलना में भी अधिक है.

3. गैर-कोयला खदानों की तुलना में कोयला भूमिगत खदानों में कर्मचारियों को जोखिम / खतरे अधिक हैं.

कोयला खदानों में दुर्घटनाओं से बचने के लिए नवीनतम तकनीक के साथ सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

क) जोखिम मूल्यांकन आधारित सुरक्षा प्रबंधन योजना (एसएमपी) की तैयारी और कार्यान्वयन.

ख) ट्रिगर एक्शन रिस्पांस प्लान (टीएआरपी) के साथ-साथ प्रिंसिपल हैज मैनेजमेंट प्लान्स (पीएचएमपी) की तैयारी और कार्यान्वयन.

ग) साइट-स्पेसिफिक रिस्क एसेसमेंट आधारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का निर्माण और अनुपालन.

घ) खदानों का सुरक्षा ऑडिट आयोजित करना.

ड) विभिन्न सुरक्षा मापदंडों की निगरानी के लिए ऑनलाइन केंद्रीकृत सुरक्षा निगरानी प्रणाली विकसित की गई है.

यह गौरतलब है कि खदान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) खदानों में कार्यरत श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए खदान अधिनियम, 1952 के प्रावधानों का प्रबंधन करता है.

इसके अलावा, खदान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) खदान श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निम्नलिखित कदम उठाता है:

(i) नियमित निरीक्षण किए जाते हैं और निरीक्षणों के दौरान टिप्पणियों के आधार पर, उल्लंघनों को इंगित करने, अनुमति वापस लेने, सुधार नोटिस जारी करने, रोजगार पर प्रतिबंध लगाने और कानूनन अदालत में मुकदमा चलाने जैसे कार्य श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किए जाते हैं.

(ii) दुर्घटनाओं की जांच के आधार पर, दुर्घटनाओं के बारे में पूछताछ की जाती है, जैसे कि अपराधी को चेतावनी देने के लिए, प्रमाण पत्र का निलंबन, काम करने की विधि में संशोधन, वेतन वृद्धि को रोकने जैसे प्रबंधन द्वारा कार्रवाई, सेवा से बर्खास्तगी, दर्ज की गई चेतावनी, पदोन्नति पर रोक और कानूनन अदालत में मुकदमा चलाया जाता है.

 (iii) नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन सेफ्टी इन माइंस, नेशनल सेफ्टी अवार्ड्स (माइन्स), ऑब्जर्वेंस ऑफ सेफ्टी वीक, सेफ्टी कैंपेन, वर्कशॉप्स करवाने, सेफ्टी कमेटी बैठकें आदि आयोजित करवाकर सुरक्षा प्रचार भी किया जाता है.

(iv) समय-समय पर, खदान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) परिपत्रों को चिन्हित खदान क्षेत्रों में सुरक्षित संचालन के लिए दिशानिर्देश के रूप में जारी किया जाता है.

(v) जोखिम मूल्यांकन तकनीकों और जोखिमों को दूर करने के लिए और काम करने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सुरक्षा प्रबंधन योजना तैयार करना.

(vi) खदानों में असुरक्षित प्रथाओं से बचने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं को लागू करना.

(vii) खदानों में सुरक्षा मानकों में सुधार के लिए प्रबंधकों और पर्यवेक्षकों के बीच सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.

हालांकि खदान मंत्रालय द्वारा 24 अगस्त, 2020 को जारी किए गए नोटिस में विकास में तेजी लाने और रोजगार सृजन के लिए खनन सुधारों का प्रस्ताव दिया गया है, लेकिन इसमें खदान श्रमिकों के व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर चर्चा नहीं की गई है.

यह गौरतलब है कि व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता 13 केंद्रीय श्रम कानूनों (द माइन्स एक्ट, 1952 सहित) में प्रावधानों को सरल, तर्कसंगत और सम्‍मिलित करती है और कारखानों, खदानों, डॉक; संविदा कर्मी, प्रवासी श्रमिक और कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कामकाजी परिस्थितियों से संबंधित कानूनों को शामिल करती है. इसके अलावा, सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति केवल व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तों कोड के तहत 100 या अधिक श्रमिकों को रोजगार देने वाली खदानों तक सीमित है. इसका मतलब है कि छोटे खदानों में कर्मचारियों (औपचारिक अनुबंधों के बिना किसी दस्तावेजी सबूत के अनौपचारिक सहित) को कोड के कवरेज से बाहर रखा गया है.

 

References:

The Occupational Safety, Health and Working Conditions Code 2020, please click here to access

Briefing Note for Parliamentarians on Labour Law Reforms prepared by Working Peoples' Charter dated 21st September, 2020, please click here to access

Press release by Mineral Inheritors Rights Association (MIRA) dated 27th August, 2020, please click here to access

Notice by the Ministry of Mines dated 24th August, 2020, please click here to access

Reply to Unstarred Question No. 1156 to be answered on 19th September, 2020 in the Lok Sabha, Ministry of Labour and Employment, please click here to access

Reply to Unstarred Question No. 620 to be answered on 16th September, 2020 in the Lok Sabha, Ministry of Coal, please click here to access   

Reply to Unstarred Question No. 3455 to be answered on 16th March, 2020 in the Lok Sabha, Ministry of Labour and Employment, please click here to access

Addendum to Guidelines by the Ministry of Home Affairs Guidelines dated 25th March 2020, please click here to access

Guidelines by the Ministry of Home Affairs dated 24th March, 2020, please click here to access

Order of the Ministry of Home Affairs dated 24th March, 2020, please click here to access

Why are the MPs criticising the new Labour Codes? Are labourers going to lose out? -Ridhi Shetty, TheLeaflet.in, 29 September, 2020, please click here to access

Occupational Safety Continues to be Ignored as a Right -KR Shyam Sundar, Economic and Political Weekly, Vol. 55, Issue No. 39, 26 September, 2020, please click here to access

During a Lockdown, Why Is the Mining Industry Considered 'Essential'? -Manju Menon and Kanchi Kohli, TheWire.in, 2 April, 2020, please click here to read more

 

Image Courtesy: Inclusive Media for Change/ Shambhu Ghatak

 

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