मातृ मृत्यु के SDG-3 लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हमें दक्षिणी राज्यों से सीखने की आवश्यकता है

मातृ मृत्यु के SDG-3 लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हमें दक्षिणी राज्यों से सीखने की आवश्यकता है

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published Published on Aug 16, 2020   modified Modified on Aug 17, 2020

मातृ मृत्यु अनुपात पर जारी नए विशेष बुलेटिन से पता चलता है कि साल 2014-16 में भारत का मातृ मृत्यु अनुपात (MMRatio) 130 मातृ मृत्यु प्रति एक लाख जीवित जन्म था जोकि साल 2015-17 में घटकर 122 मातृ मृत्यु प्रति एक लाख जीवित जन्म हो गया, और यह साल 2016-18 के दौरान घटकर 113 मातृ मृत्यु प्रति एक लाख जीवित जन्म रह गया है.

सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) के अनुसार, मातृ मृत्यु अनुपात प्रति वर्ष प्रति 100,000 महिलाओं गर्भावस्था की जटिलताओं, प्रसव या नवजात को जन्म देने के दौरान होने वाली जननी मृत्यु की संख्या के रूप में परिभाषित किया गया है. यह अनुपात जीवित जन्मों की संख्या के संबंध में मातृ मृत्यु के जोखिमों को दर्शाता है.

हालाँकि देश ने पिछले कुछ वर्षों में मातृ मृत्यु अनुपात को कम करने के बेहतर प्रयत्न किए हैं, लेकिन आगामी वर्ष 2030 तक अपनी मातृ मृत्यु को 70 मातृ मृत्यु प्रति एक लाख जीवित जन्म से नीचे लाने के लिए आने वाले वर्षों में निरंतर प्रयास करना होगा ताकि साल 2030 तक संयुक्त राष्ट्र के विकास लक्ष्य (SDG) यानी SDG-3 के तहत लक्ष्य 3.1.1 को प्राप्त किया जा सके, जो स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करने और सभी उम्र के लोगों की बेहतरी को बढ़ावा देने के बारे में है.

देश को वर्ष 2020 तक 100 मातृ मृत्यु अनुपात को कम कर 100 मातृ मृत्यु प्रति लाख जीवित जन्म करने का लक्ष्य हासिल करना है, जोकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 द्वारा निर्धारित लक्ष्य है.

मातृ मृत्यु अनुपात

उच्च मातृ मृत्यु अनुपात समाज में महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की दयनीय कार्यप्रणाली और गर्भवती महिलाओं की खराब पोषण स्थिति को उजागर करता है.

रजिस्ट्रार जनरल (इंडिया) कार्यालय के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) द्वारा प्रकाशित, नए बुलेटिन से पता चलता है कि 2016-18 के दौरान राष्ट्रीय स्तर के मातृ मृत्यु अनुपात (113) की तुलना में असम (215), बिहार (149), मध्य प्रदेश (173), छत्तीसगढ़ (159), ओडिशा (150), राजस्थान (164), उत्तर प्रदेश (197) और पंजाब (129) जैसे राज्यों ने खराब प्रदर्शन किया है. अधिकांश अंडरपरफॉर्मिंग राज्य (पंजाब को छोड़कर) एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप (ईएजी) राज्य हैं. कृपया तालिका -1 में विवरण देखें.

तालिका 1: मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर), मातृ मृत्यु दर और जोखिम; भारत, ईएजी और असम, दक्षिण और अन्य राज्य, साल 2016-18

स्रोत: सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) द्वारा जारी भारत में मातृ मृत्यु दर पर विशेष बुलेटिन 2016-18, पहुंचने के लिए कृपया यहां और यहां क्लिक करें.

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राष्ट्रीय स्तर के मातृ मृत्यु अनुपात (113) की तुलना में झारखंड (71), उत्तराखंड (99), आंध्र प्रदेश (65), तेलंगाना (63), कर्नाटक (92), केरल (43), तमिलनाडु (60), गुजरात (75), हरियाणा (91), महाराष्ट्र (46), पश्चिम बंगाल (98) और अन्य राज्य(85) ने बेहतर प्रदर्शन किया है.

केरल (43) में सबसे कम मातृ मृत्यु अनुपात है क्योंकि अन्य राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों के मुकाबले बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, प्रसव के दौरान बेहतर देखभाल और गर्भवती महिलाओं को अच्छा पौष्टिक आहार मिलने की वजह से केरल का मातृ मृत्यु अनुपात सबसे बेहतर है. अधिकांश दक्षिणी राज्यों (कर्नाटक को छोड़कर) ने पहले ही मातृ मृत्यु अनुपात से संबंधित SDG-3 लक्ष्य प्राप्त कर लिया है. अन्य राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों की तुलना में असम (215) का मातृ मृत्यु अनुपात सबसे अधिक है.

मातृ मृत्यु पर हाल ही में सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) द्वारा जारी बुलेटिन में, राज्यों को तीन समूहों में वर्गीकृत किया गया है. "सशक्त कार्रवाई समूह" (ईएजी) नामक समूह में में बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड और असम शामिल हैं; "दक्षिणी" राज्यों में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं; और "अन्य" में शेष बचे राज्य/ केन्द्रशासित प्रदेश शामिल हैं.

राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के पिछले रुझानों को जानने के लिए, 20 नवंबर, 2019 को जारी किए गए ‘मातृ मृत्यु को कम करने का लक्ष्य अभी दूर है' नामक न्यूज अलर्ट को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

बुलेटिन के अनुसार, वर्बल ऑटोप्सी (वीए) उपकरणों का उपयोग एसआरएस के तहत देश में मृत्यु दर के विशिष्ट कारणों की जानकारी जुटाने के लिए किया जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान या गर्भधारण से संबंधित किसी भी कारण से, या गर्भावस्था की समाप्ति के 42 दिनों के भीतर, गर्भवती की मौत होने को मातृ मृत्यु के रूप में परिभाषित किया जाएगा. किसी दूसरी वजह से होने वाली आकस्मिक मृत्यु को मातृ मृत्यु से जोड़कर नहीं देखा जाता.

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मातृ मृत्यु अनुपात

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष द्वारा प्रकाशित, ‘अगेंस्ट माय विलडिफाइंग द प्रैक्टिसिस दैट हार्म वीमैन एंड गर्ल्स एंड अंडरमाइन इक्वॉलिटी’ (जून 2020 में जारी) नामक रिपोर्ट के अनुसार, मातृ मृत्यु अनुपात अफगानिस्तान (638) में सबसे अधिक था, उसके बाद नेपाल (186), भूटान (183), बांग्लादेश (173), भारत (145), पाकिस्तान (140), मालदीव (53), श्रीलंका (36) और चीन (29) में था. 

डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ, यूएनएफपीए, विश्व बैंक समूह और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या प्रभाग द्वारा जारी ‘मातृ मृत्यु दर के रुझान: 2000 से 2017 तक’ नामक रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार, नाइजीरिया और भारत में क्रमशः लगभग 67,000 और 35,000 मातृ मृत्यु (23 प्रतिशत और वैश्विक मातृ मृत्यु का 12 प्रतिशत) हुई हैं, जोकि दुनियाभर की अनुमानित मातृ मृत्यु का लगभग एक तिहाई (2017 में अनुमानित वैश्विक मातृ मृत्यु का 35 प्रतिशत) है. उस रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया कि देश के लिए मातृ मृत्यु अनुपात (अनुमानित अनुमान) 2000 में 370, 2005 में 286, 2010 में 210, 2015 में 158 और 2017 में 145 था.

मातृ मृत्यु दर

सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) के अनुसार, मातृ मृत्यु दर (MMR) को 15-49 आयु वर्ग की प्रति लाख महिलाओं में नवजात शिशुओं को जन्म देने पर होने वाली मातृ मृत्यु की संख्या के रूप में परिभाषित किया गया है. यह दर गर्भावस्था या जन्म के समय मातृ मृत्यु के जोखिम और जनसंख्या में प्रजनन क्षमता के स्तर को इंगित करती है. मातृ मृत्यु दर (MMR) और मातृ मृत्यु अनुपात (MMRatio) के बीच संबंध को समझने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें.

2016-18 के दौरान राष्ट्रीय स्तर के मातृ मृत्यु दर (7.3) की तुलना में, असम (14.0), बिहार (15.1), मध्य प्रदेश (15.9), छत्तीसगढ़ (12.1), ओडिशा (9.7), राजस्थान (14.5) और उत्तर प्रदेश (17.8) जैसे राज्यों ने खराब प्रदर्शन किया है. कृपया विवरण के लिए तालिका -1 देखें.

2016-18 के दौरान राष्ट्रीय स्तर के मातृ मृत्यु दर (7.3) से बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में झारखंड (5.6), उत्तराखंड (6.4), आंध्र प्रदेश (3.6), तेलंगाना (3.6), कर्नाटक (4.9), केरल (2.1), तमिलनाडु (3.2), गुजरात (5.1), हरियाणा (7.0), महाराष्ट्र (2.6), पंजाब (7.0), पश्चिम बंगाल (5.0) और अन्य राज्य (4.5) जैसे राज्य हैं.

अन्य राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के मुकाबले केरल (2.1) में सबसे कम और उत्तर प्रदेश (17.8) में सबसे अधिक मातृ मृत्यु दर है.

मातृ मृत्यु अनुपात और मातृ मृत्यु दर में क्या अंतर है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रति लाख नवजातों पर होने वाली मातृ मृत्यु की संख्या मातृ मृत्यु अनुपात कहलाती है, जैसा कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की मौत के खतरे को मापने का पैमाना है. इसे एक उदाहरण से समझते हैं एक गांव है जिसकी आबादी 1000 है. 20 महिलाएं गर्भवती हैं, 5 शिशु का गर्भपात हो गया, 15 महिलाओं ने नवजात शिशुओं को जन्म दिया, 5 महिलाओं की प्रसव के दौरान मौत हो जाती है. इस मामले में 15 नवजात शिशुओं के जन्म के दौरान 5 मातृ मृत्यु हुई, जो 33.3 प्रतिशत है.

मातृ मृत्यु अनुपात के उलट मातृ मृत्यु दर, 15-49 आयु वर्ग की महिलाओं में प्रति लाख नवजात शिशुओं को जन्म देने पर होने वाली मातृ मृत्यु की संख्या है. इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है कि जैसे एक गांव में 1000 की आबादी है. वहां 500 महिलाएं हैं. इनमें से 400 प्रजनन आयु समूह की हैं. पिछले साल 15 महिलाओं ने 15 जीवित शिशु को जन्म दिया. इनमें से 5 महिलाओं की गर्भावस्था के दौरान मौत हो गई. तब मातृ मृत्यु दर, 400 प्रजनन आयु समूह की महिलाओं में से 5 की मातृ मृत्यु हुई, जो 1.25 प्रतिशत हुई.

जीवन जोखिम

सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) के अनुसार, जीवन जोखिम को इस संभावना के रूप में परिभाषित किया जाता है कि प्रजनन आयु (15-49 वर्ष) की कम से कम एक महिला की मृत्यु बच्चे के जन्म या प्रसव की समयावधि के दौरान पैदा हुई मृत्यु की परिस्थितियों के कारण हुई हो. 

वर्ष 2016-18 के दौरान राष्री् य स्तर पर प्रचलित जीवन जोखिम के मुकाबले असम (0.5 प्रतिशत), बिहार (0.5 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (0.6 प्रतिशत), छत्तीसगढ़ (0.4 प्रतिशत), राजस्थान (0.5 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (0.6 प्रतिशत) जैसे राज्यों ने अपेक्षाकृत खराब प्रदर्शन किया है. कृपया विवरण के लिए तालिका -1 देखें.

इसके विपरीत, जिन राज्यों ने 0.3 प्रतिशत के राष्ट्रीय स्तर के जीवन जोखिम के आंकड़े से बेहतर प्रदर्शन किया है, वे हैं झारखंड (0.2 प्रतिशत), ओडिशा (0.3 प्रतिशत), उत्तराखंड (0.2 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (0.1 प्रतिशत), तेलंगाना (0.1 प्रतिशत), कर्नाटक (0.2 प्रतिशत), केरल (0.1 प्रतिशत), तमिलनाडु (0.1 प्रतिशत), गुजरात (0.2 प्रतिशत), हरियाणा (0.2 प्रतिशत), महाराष्ट्र (0.1 प्रतिशत), पंजाब (0.2 प्रतिशत), पश्चिम बंगाल (0.2 प्रतिशत) और अन्य राज्य (0.2 प्रतिशत).

राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों में सबसे अधिक जीवन जोखिम उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश (प्रत्येक 0.6 प्रतिशत) में पाया गया है. राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों में सबसे कम जीवन जोखिम आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र (0.1 प्रतिशत प्रत्येक) में देखा गया है.

वर्ष 2016-18 के दौरान, 20-24 वर्ष (33 प्रतिशत) में महिलाओं में सबसे अधिक मातृ मृत्यु हुई, इसके बाद 25-29 वर्ष (32 प्रतिशत), 30-34 वर्ष (17 प्रतिशत), 34-39 वर्ष (7.0 प्रतिशत), 15-19 वर्ष (5.0 प्रतिशत), 40-44 वर्ष (4.0 प्रतिशत) और 45-49 वर्ष (1.0 प्रतिशत) मातृ मृत्यु हुई.

References:

Special Bulletin on Maternal Mortality in India 2016 18, Sample Registration System, Office of the Registrar General, India, please click here and here to access

Sustainable Development Goals National Indicator Framework Progress Report, 2020 (Version 2.1), National Statistical Office (NSO), Ministry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI), please click here to access

State of World Population 2020 report entitled Against My Will - Defying the practices that harm women and girls and undermine equality (released in June 2020), published by the United Nations Population Fund, please click here and here to access

Trends in Maternal Mortality 2000 to 2017: Estimates by WHO, UNICEF, World Bank Groups and the United Nations Population Division, released in September 2019, World Halth Orgnization (WHO), United Nations Children's Fund (UNICEF), World Bank Groups, United Nations Population Fund (UNFPA) and the United Nations Population Division, please click herehere and here to access

National Health Policy 2017, Ministry of Health and Family Welfare, please click here to access

A Presentation on Maternal Mortality Levels (2010-12), Office of the Registrar General (India), please click here to access

News alert: The country has miles to go in reducing maternal deaths, Published on Nov 20, 2019, Inclusive Media for Change, please click here to read more

Ensuring delayed marriage requires concerted efforts to keep girls in school for longer -Sheila Vir, The Indian Express, 28 July, 2020, please click here to access

Explained — Maternal mortality rate in the states: Assam 229, Kerala 42, The Indian Express, 9 November, 2019, please click here to access

Kerala's maternal mortality rate drops to 46, govt aims 30 by 2020 -Vishnu Varma, The Indian Express, 7 June, 2018, please click here to access

 

Image Courtesy: Inclusive Media for Change/ Shambhu Ghatak



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