कमजोर वर्ग के छात्रों को मुफ्त पुस्तक देने संबंधी याचिका पर अदालत ने सरकार से जवाब मांगा

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published Published on May 30, 2013   modified Modified on May 30, 2013
नयी दिल्ली (भाषा)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने निजी गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग : ईडब्ल्यूएस : के छात्रों को मुफ्त पुस्तकें और यूनीफार्म उलब्ध नहीं कराये जाने का आरोप लगाते हुये दायर याचिका पर आज दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया। याचिका में कहा गया है कि निजी गैर सहायता प्राप्त स्कूलों के रवैये से शिक्षा के अधिकार कानून के प्रावधानों का उल्लघंन होता है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी मुरूगेसन और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने स्वंयसेवी संस्था ‘जस्टिस फॉर आॅल' की जनहित याचिका पर दिल्ली सरकार और उसके शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किये। दिल्ली सरकार को सात अगस्त तक नोटिस का जवाब देना है।
स्वयंसेवी संस्था ‘जस्टिस फार आॅल' ने याचिका में आरोप लगाया है कि लगभग सभी गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूल यहां शिक्षा का अधिकार :आरटीई: कानून और दिल्ली

आरटीई नियमों के उन प्रावधनों का उल्लंघन कर रहे हैं जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग :ईडब्ल्यूएस: के छात्रों को स्कूल से नि:शुल्क पुस्तके एवं यूनीफार्म प्रदान करने का अधिकार दिया गया है।
याचिका में कहा गया है कि सरकार जिस दर पर अपने विद्यालयों में पुस्तकें और यूनीफार्म बिक्री करते हैं उस दर पर स्कूल भुगतान प्राप्त करने के अधिकारी हैं।
याचिका के अनुसार, स्कूल भुगतान प्राप्त कर रहे हैं लेकिन वे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को मुफ्त पुस्तकों एवं यूनीफार्म मुहैया नहीं करा रहे हैं। ।
याचिका के अनुसार, ‘‘ उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने फरवरी 2011 में शिक्षा निदेशालय को इस संबंध में दिशा निर्देश तैयार करने का निर्देश दिया था लेकिन सरकार ऐसा करने में विफल रही है और स्कूल शिक्षा के अधिकार कानून के प्रावधानों का उल्लंघन कर रहे हैं।''


http://www.jansatta.com/index.php/component/content/article/45784-2013-05-29-12-16-36


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