नोटबंदी के दौरान लाई गई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के पैसे का क्या हुआ, सरकार को नहीं पता

Share this article Share this article
published Published on May 6, 2019   modified Modified on May 6, 2019
नई दिल्ली: सोचिए. अगर भारत में गरीब न होते तो क्या होता? कुछ होता या न होता लेकिन इतना तो तय था कि हमारी राजनीति काफी नीरस हो जाती. ये गरीब ही हैं, जिनकी वजह से भारत की राजनीति इतनी दिलचस्प बनी हुई है.

चाहे वो इंदिरा गांधी का गरीबी हटाओ का नारा हो या मनमोहन सिंह का मनरेगा हो या फिर नरेंद्र मोदी द्वारा शुरु की गई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना हो. गरीब ही हैं जो पिछले 70 सालों से भारतीय राजनीति की लहलहाती फसल को खाद-पानी मुहैया कराते आ रहे हैं.

आठ नवंबर 2016, भारतीय राजनीतिक इतिहास का एक ऐसा दिन, जिसे शायद ही कभी भुलाया जा सकेगा. इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विमुद्रीकरण (नोटबंदी) की घोषणा की थी. ये आर्थिक घटना, आर्थिक आपदा साबित हुई या आर्थिक रूप से गेमचेंजर बनी, इसका लेखाजोखा इतिहास के पन्नों में जब किया जाएगा, तब किया जाएगा.

फिलहाल, हम नोटबंदी के दौरान ही घोषित एक अन्य योजना की बात करते हैं. इस योजना का नाम है प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना.

दरअसल, इस योजना की घोषणा के पीछे नेक नीयत रही हो य न रही हो, लेकिन राजनीति जरूर थी. वो ऐसे कि अचानक नोटबंदी की घोषणा से पूरे देश में एक तरह की अफरातफरी मच गई थी.

गरीब से लेकर मध्य वर्ग तक परेशान था. हालांकि, प्रधानमंत्री ने देशवासियों से 50 दिन की मोहलत मांगी थी और ये आश्वासन दिया था कि सबकुछ ठीक हो जाएगा, देश से कालाधन खत्म हो जाएगा, ईमानदारों को कोई दिक्कत नहीं आएगी, आदि-आदि.

लेकिन, नोटबंदी की घोषणा के एक महीने बाद तक भी जिस तरह से रोज-रोज सरकार नियमें बदल रही थी, उससे साफ हो गया था कि नोटबंदी की घोषणा से पहले सरकार की तैयारी पूरी नहीं थी.

द वायर हिन्दी पर प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें


http://thewirehindi.com/80440/pradhanmantri-gareeb-kalyan-yojna-money-expenditure-detail-rti/


Related Articles

 

Write Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later

Contact Form

Please enter security code
      Close