प्राइमरी स्कूल के ज्यादा वजन वाले बच्चों में सोचने की क्षमता कम, तार्किक फैसला लेने में जूझते हैं

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published Published on Oct 31, 2019   modified Modified on Oct 31, 2019
वॉशिंगटन. प्राइमरी स्कूल के जिन बच्चों में मोटापे की समस्या होती है, उनकी सोचने की क्षमता कम होती है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के शोधकर्ताओं ने यह खुलासा किया। उन्होंने 9 से 11 साल के मोटे या अधिक वजन वाले करीब 2700 बच्चों पर यह अध्ययन किया। अध्ययन में पाया गया कि मोटे बच्चे किसी भी समस्या को हल करने में धीमे होते हैं। ऐसे बच्चों में कॉर्टेक्स काफी पतले थे। कॉर्टेक्स मस्तिष्क का एक हिस्सा है, जो तार्किक प्रश्नों को हल करने में काफी अहम होता है।

दैनिक भास्कर पर प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें


https://www.bhaskar.com/international/news/cambridge-university-study-primary-school-children-who-obese-have-poorer-thinking-skill-01672363.html?ref=ht


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