बुजुर्गों को पेंशन देने के पैसे नहीं, और एनआरसी पर लाखों करोड़ खर्च रही सरकार

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published Published on Jan 24, 2020   modified Modified on Jan 24, 2020
21 जनवरी को दिल्ली के 20 से अधिक संगठनों मिलकर जंतर मंतर पर पेंशन परिषद के बैनर तले पेंशन के मुद्दे पर ‘पेंशन नहीं तो वोट नहीं’ धरने का आयोजन किया। इस धरना रैली में दिल्ली एनसीआर के कोने-कोने से हजारों की संख्या में लोग एकजुट हुए और मंच से अपनी तकलीफें साझा की। इसमें सेक्स वर्कर, विकलांग, बेघर, असंगठित क्षेत्र के मजदूर, ट्रांसजेंडर, एकल व विधवा महिलाएं, बुजुर्ग अपने संवैधानिक अधिकार ‘जीने का अधिकार’ के तहत सार्वजनिक सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए संघर्ष को एकजुट होकर आए। 

बता दें कि दिल्ली में फिलहाल 19 लाख बुजुर्ग रहते हैं। जबकि देश की 93 प्रतिशत आबादी असंगठित क्षेत्रों में काम करती है जहां अक्सर कम वेतन, कम सुविधा और स्वास्थ्य संबंधी अधिकतम जोखिमों के साथ करना पड़ता है। देश में फिलहाल भारत सरकार की ओर से राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के तहत जो पेंशन दी जा रही है उसमें केंद्र सरकार योगदान केवल 200 रुपए होता है।

पेंशन परिषद की ओर से दिल्ली की तमाम राजनीतिक पार्टियों को भी अपने मंच पर आकर पेंशन पर लोगो की बातें सुनने और अपनी पार्टी का एजेंडा रखने के लिए बुलाया गया था। पेंशन परिषद से बताया गया कि हम लोगो ने सबसे पहले कांग्रेस पार्टी से संपर्क किया। उन्होंने हमारे प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार किया और अपने प्रतिनिधि को भेजने का वायदा किया भी और निभाया भी। उनकी पार्टी की ओर कीर्ति आजाद आए लोगो की बातें सुनी और अपनी पार्टी की बात रखी। पेंशन परिषद की मंच परआम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि भी आए और उन्होंने पेंशन स्कीम को दिल्ली में लागू करने का वायदा किया। जबकि योगेंद्र यादव की स्वराज पार्टी की ओर से आने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद कोई नहीं आया। पेंशन परिषद के मंच से बताया गया कि जब वो लोग बुजुर्गों को पेंशन की मांग लेकर भाजपा के दफ्तर गए तो वहां उनसे बात तक नहीं सुनी गई। न ही कोई संवाद हुआ। उन्हेंने कोई दिलचस्पी ही नहीं ली इस मुद्दे पर।
 
पूरी रिपोर्ट को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 

सुशील मानव, http://www.mediavigil.com/news/thousands-protest-at-jantar-mantar-for-pension/?fbclid=IwAR29UzbBXvW33Wa0Zdu6uJ_P86_5FGxNaakVya1K95osUK--L5ekxderhbg


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