भारत की कोरोना महामारी कैसे पूरी दुनिया पर पड़ेगी भारी

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published Published on May 9, 2021   modified Modified on May 10, 2021

-बीबीसी,

कोरोना महामारी की दूसरी लहर का भारत पर तबाही और बर्बादी लाने वाला असर दिखने लगा है. पिछले तीन दिनों से भारत में कोरोना संक्रमण के चार लाख से भी ज़्यादा मामले हर रोज़ दर्ज किए जा रहे हैं.

इस महामारी के कारण बीते सात दिनों से हर रोज़ औसतन 3700 से भी ज़्यादा लोगों की मौत हो रही है. जॉन्स हॉक्पिन्स युनिवर्सिटी के डैशबोर्ड के अनुसार महामारी की शुरुआत से इस वायरस से अब तक देश में 2.22 करोड़ से ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और 2.42 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

विशेषज्ञ इस ओर भी ध्यान दिला रहे हैं कि भारत में संक्रमण और मृत्यु के सरकारी आँकड़े और जमीनी हक़ीक़त में बड़ा फासला है. भारत में महामारी की दूसरी लहर को कई पहलुओं से जोड़कर देखा जा रहा है.

पहला तो ये कि आँकड़े ठीक से इकट्ठा नहीं किए गए और सरकार ने हक़ीक़त को नज़रअंदाज़ करते हुए उसे ख़ुशी से स्वीकार कर लिया. दूसरी वजह ये रही कोरोना वायरस का एक नया वैरिएंट उम्मीद और सोच से कहीं ज़्यादा घातक रहा.

तीसरी वजह ये थी कि देश में चुनाव का मौसम था, कुंभ आयोजित किया गया और ये सब कुछ कोविड प्रोटोकॉल को किनारे रखते हुए किया गया. अब ये साफ़ है कि देश की आबादी का बड़ा हिस्सा एक मानवीय संकट का सामना कर रहा है.

1. एक साल जिसे भारत ने खो दिया

भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और विश्व के आर्थिक विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहता है. भारत का आर्थिक विकास तुलनात्मक रूप से चार से आठ फ़ीसदी के बीच रहता आया है. उसके पास दुनिया का एक बहुत बड़ा बाज़ार है.

यहां तक कि महामारी के आने से पहले साल 2020 के शुरू में विश्व मुद्रा कोष ने कहा था कि भारत के योगदान में कमी के कारण ही साल 2018 और 2019 में वैश्विक विकास में सुस्ती देखी गई थी.

साल 2020 के लिए आईएमएफ़ ने भारत की विकास दर को लेकर अपना पूर्वानुमान कम करके 5.8 फीसदी कर दिया था. हालांकि आईएमएफ़ को भारतीय उपमहाद्वीप से ज़्यादा की उम्मीद थी.

अब ऐसा लग रहा है कि साल 2020 में वैश्विक विकास की दर गिरकर चार फ़ीसदी के पास रह गई जबकि भारत के विकास दर में लगभग दस फ़ीसदी की गिरावट हुई है.

साल 2021 के लिए हर किसी को ये उम्मीद थी कि भारत और दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर अपने पैरों पर खड़ी हो जाएगी लेकिन अब इन अनुमानों पर पानी फिरता हुआ दिख रहा है.

उदाहरण के लिए इन्वेस्टमेंट समूह नोमुरा की चीफ़ इकॉनॉमिस्ट सोनल वर्मा ने अनुमान लगाया है कि भारत का सकल घरेलू उत्पाद मौजूदा तिमाही में 1.5 फीसदी सिकुड़ जाएगा.

ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं भी भारत की तरह ही संकट का सामना कर रही हैं. ऐसे में हम उम्मीद कर सकते हैं कि दुनिया के विकास पर भी इसका असर पड़ेगा.

पूरा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


उमा एस कमभपति, https://www.bbc.com/hindi/india-57041214


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