राष्ट्रीय शिक्षा नीति मसौदा पुरातनपंथी नहीं पर शक है कि इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा- योगेन्द्र यादव

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published Published on Jun 27, 2019   modified Modified on Jun 27, 2019
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (2019) का मसौदा मैंने पढ़ना शुरू किया तब मन में शंका थी. ये दस्तावेज तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावेड़कर के आदेश पर तैयार हुआ है. स्मृति ईरानी के आदेश पर एक मसौदा इससे पहले भी तैयार हुआ था लेकिन मंत्रालय ने उसे खारिज कर दिया था. मसौदे को तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष कोई शिक्षाविद नहीं बल्कि अंतरिक्ष-विज्ञानी के. कस्तूरीरंगन हैं. शिक्षा नीति के बाबत जानकारी के लिए मैं जिन ख्यातनाम विद्वानों का लिखा-बोला देखते-सुनते आया हूं, उनमें से कोई भी इस समिति में शामिल नहीं था. और, फिर 2018 के दिसंबर में रिपोर्ट के सौंपे जाने के बाद से उसे जिसे तरह ढंक-छिपाकर रखा गया था, उससे भी मेरे मन में शंका उठ रही थी.

मेरे मन में चार बड़े डर थे. एक डर ये था कि बीजेपी के शासन में शिक्षा नीति भगवाकरण के अजेंडे का ही एक प्रतिबिम्ब होगी, लग रहा था कि शिक्षानीति हिन्दूकरण और सांप्रदायिक सोच में दीक्षित करने की वैसी ही बेबाक कोशिश साबित होगी जिसकी बानगी हमें दीनानाथ बत्रा सरीखों की बातों से मिलती रही है. दूसरे, मन में ये डर भी समाया था कि सरकार कहीं शिक्षा के क्षेत्र से अपने हाथ एकदम ही न खींच ले, कहीं निजीकरण के नाम पर हर जगह घटिया दर्जे की शिक्षा की दुकानें खोलने-चलाने का रास्ता न खुल जाये. तीसरा डर था कि कहीं शिक्षा-नीति, शिक्षा के वृहत्तर लक्ष्यों की अनदेखी करते हुए तकनीकशाही वाला संकीर्ण और उपयोगितावादी नजरिया न अपना ले. और मन में चौथा डर ये समाया था कि हो सकता है कि शिक्षा नीति में शिक्षा विषयक समतामूलक सोच की अनदेखी हो, मुस्लिम और अन्य वंचित वर्ग शिक्षा के मामले में फिलहाल जिस घाटे की हालत में है, उस पर शिक्षा नीति के दस्तावेज में ध्यान न दिया जाय.


लेकिन चार सौ सतहत्तर पन्ने के दस्तावेज को पढ़ने के बाद मुझे अचरज भरी खुशी हुई कि मेरे मन में समाया कोई भी डर सच न निकला. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे (डीएनईपी) से निकलती पहली अच्छी खबर तो यही है कि ये दस्तावेज पुरानतनपंथी सोच की टेक पर बना कोई षड़यंत्रकारी ‘व्याकरण' नहीं है. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा पहले के दो शिक्षा नीति विषयक रिपोर्ट, उच्च शिक्षा पर बनी यशपाल समिति की रिपोर्ट, शिक्षकों की शिक्षा पर केंद्रित जस्टिस वर्मा समिति की रिपोर्ट, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या फ्रेमवर्क और नेशनल अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन पॉलिसी, 2013 को बुनियाद बनाते हुए तैयार किया गया है. ये अलग बात है कि मसौदे में इस तथ्य को स्वीकार करने में संकोच से काम लिया गया है.

 द प्रिन्ट हिन्दी पर प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 


https://hindi.theprint.in/opinion/national-education-policy-2019-is-not-conservative-conspiracy-but-it-may-never-take-off/70832/


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