सरकारी स्कूलों में 80% बच्चे फेल

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published Published on Mar 11, 2013   modified Modified on Mar 11, 2013
जोधपुर.स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के उद्देश्य से चलाए जा रहे संबलन कार्यक्रम के अब तक सकारात्मक परिणाम नहीं मिले हैं। अधिकतर स्कूलों के शैक्षिक स्तर में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। अधिकारियों ने पिछले दिनों जिन स्कूलों का निरीक्षण किया, वहां अस्सी फीसदी बच्चे पढ़ व लिख नहीं पा रहे थे।
 
सर्व शिक्षा अभियान ने सत्र 2012-13 में पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों का शैक्षणिक स्तर सुधारने के लिए तीन बार संबलन कार्यक्रम चलाया। इसके तहत करीब पौने तीन सौ स्कूलों के  करीब चार हजार बच्चों की बौद्धिक कुशलता जांची गई जिनमें 80 फीसदी बच्चे फेल हो गए।
 
ऐसे चला संबलन कार्यक्रम
 
संबलन कार्यक्रम का प्रथम चरण गत वर्ष सितंबर, दूसरा चरण दिसंबर और तीसरा इस वर्ष फरवरी में हुआ। तीनों ही चरणों में किसी भी अध्यापक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई।
 
इसलिए नहीं है डर
 
संबलन कार्यक्रम में सिर्फ स्कूलों की प्रोग्रेस रिपोर्ट तैयार होगी। इसमें बच्चों को पढ़ाने वाले टीचर पर कार्रवाई नहीं करने का नियम होने से शिक्षक बेफिक्र हैं।
 
टीचर को पता नहीं राज्यपाल कौन
 
अधिकारियों के निरीक्षण में इन स्कूलों में सामान्य ज्ञान के स्तर की पोल भी खुल गई। यहां पढ़ने वाले बच्चों को यही पता है कि राजस्थान की राज्यपाल सूर्यकांता व्यास और  मुख्यमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह हैं। देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का नाम भी उन्हें मालूम नहीं है। और तो और कई टीचर्स को भी जानकारी नहीं है कि हमारे राज्यपाल का नाम क्या है।
 
बच्चों को पाठ पढ़ना नहीं आता
 
जिले में साढ़े तीन हजार से अधिक से राजकीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलें हैं। इनमें से अधिकांश में छात्र-छात्राओं को हिंदी का पाठ पढ़ना नहीं आता। वे न तो अंग्रेजी में एबीसीडी लिख और बोल पाते हैं न ही जोड़, बाकी, गुणा और भाग ढंग से कर पाते हैं। यह स्थिति तब है जबकि स्कूल टीचर्स को विषय विशेष में दक्ष करने के लिए सरकार हर साल करोड़ों खर्च करती है।
 
आरटीई भी जिम्मेदार
 
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को फेल नहीं करने के नियम से टीचर्स में भी यह धारणा बन गई है कि बच्चे भले ही पढ़ें या न पढ़ें, उन्हें पास तो करना ही है।  
 
टीचर-स्टूडेंट्स का अनुपात सही नहीं
 
शहरी क्षेत्र की स्कूलों में कहीं आठ बच्चों पर ग्यारह टीचर लगे हुए हैं तो कहीं 300 बच्चों के बावजूद दो टीचर ही हैं। सांगरिया फांटा स्थित राप्रावि राम मोहल्ला में 280 बच्चों पर 2 और राप्रावि सूरसागर बागा में 80 बच्चों पर दो टीचर हैं। इसके उलट राउप्रावि सेक्टर 14 में 23 बच्चों पर 13 टीचर लगे हैं।
 
जिम्मेदारी तय करेंगे
 
'जिन स्कूलों ने पहले, दूसरे और तीसरे चरण में कोई सुधार नहीं किया वहां के टीचर्स की जिम्मेदारी तय की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होगी। एक तरह से यह संबंधित विषय के टीचर का रिपोर्ट कार्ड भी है। अगर कोई शिक्षक किसी विषय में कमजोर है तो उसे ट्रेनिंग भी दिलवाई जाएगी।'
 
धनराज व्यास, एडीपीसी, एसएसए
 
सुझाव दिया है
 
'बच्चों की बुनियाद प्राथमिक स्तर पर मजबूत होना जरूरी है। मैंने जिन स्कूलों की जांच की, वहां पर बच्चों को पढ़ना-लिखना ही नहीं आता। मैंने वहां पढ़ाई का स्तर सुधारने का सुझाव दिया है।'
 
गजरा चौधरी,
डीईओ, माध्यमिक।
 
योजना बनाएंगे
 
'जिन स्कूलों में बच्चों का बौद्धिक स्तर कमजोर है वहां गुणवत्तापूर्ण एजुकेशन देने के संबंध में योजना बनाएंगे।'
 
अरविंद कुमार व्यास, शैक्षिक प्रकोष्ठ अधिकारी (प्रारंभिक)
 
दो महीने में सुधार सकते हैं
 
'अगर टीचर चाहे तो डेढ़-दो महीने में बच्चों का स्तर सुधार सकते हैं। यदि वे विशेष कक्षाएं लेकर कमजोर बच्चे को अलग से समय दें तो ऐसा हो सकता है।'
 
गौरव गोयल, कलेक्टर

http://www.bhaskar.com/article/RAJ-JOD-80-of-children-in-government-schools-fell-4204190-NOR.html?C3-RAJ=


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