सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को फटकार, कोई देश अपने लोगों को मरने के लिए गैस चैंबर में नहीं भेजता

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published Published on Sep 18, 2019   modified Modified on Sep 18, 2019
नई दिल्ली: देश में मैनुअल स्कैवेंजर्स (मैला ढोने के काम में लगे लोग) की मौतों और उन्हें सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार की खिंचाई की. शीर्ष अदालत ने कहा कि देश की स्वतंत्रता को 70 साल से अधिक बीत चुके हैं लेकिन आज भी जातिगत भेदभाव बरकरार है.


इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, अदालत ने कहा, ‘दुनिया के किसी देश में लोगों को मरने के लिए गैस चैंबर्स में नहीं भेजा जाता है. हर महीने मैला ढोने के काम में लगे चार से पांच लोग की मौत हो रही है.'


जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ केंद्र सरकार की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस याचिका में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से उसके पिछले साल के फैसले की समीक्षा की मांग की थी जिसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत गिरफ्तारी के प्रावधानों को लगभग खत्म कर दिया गया था.


मैला ढोने के काम में लगे लोगों को समान सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने पर अदालत ने सरकार को फटकार लगाई. अदालत ने कहा, ‘सभी इंसान समान हैं लेकिन प्रशासन द्वारा सभी को समान सुविधाएं नहीं प्रदान की जाती हैं.'


जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने केंद्र सरकार के तरफ से उपस्थित अटॉर्नी जनरल केके वेनुगोपाल से पूछा कि मैला ढोने के काम में लगे और सीवेज एवं मेनहोल की सफाई में लगे लोगों को सुरक्षा के लिए समुचित उपकरण जैसे मास्क और ऑक्सीजन सिलेंडर क्यों नहीं दिए जाते हैं.

 

द वायर हिन्दी पर प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 


https://thewirehindi.com/95163/sc-raps-centre-no-country-sends-its-people-to-gas-chambers-to-die/


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