‘सीआईसी के आदेश के बाद भी बैंक चंदा देने वालों के नाम छुपा रहे हैं, यानी कुछ गड़बड़झाला है’

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published Published on Jan 13, 2020   modified Modified on Jan 13, 2020
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने उन लोगों के नाम बताने से इनकार कर दिया है जिन्होंने चुनावी बॉन्ड स्कीम के तहत अब तक इलेक्शन में चंदा देने के लिये एक करोड़ मूल्य वर्ग (डिनॉमिनेशन) वाले बॉन्ड खरीदे. महत्वपूर्ण है कि केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने दो दिन पहले ही केंद्र सरकार से यह बताने को कहा था कि किसने चुनावी बॉन्ड स्कीम में दानकर्ता की गोपनीयता की मांग की थी.

पारदर्शिता और जवाबदेही के लिये काम कर रही सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) से चार सवाल पूछे थे. इन सवालों में बैंक द्वारा दो जनवरी 2018 के बाद से अब तक बेचे गये कुल चुनावी बॉन्ड, उनकी कुल कीमत, एक करोड़ मूल्य वर्ग (डिनॉमिनेशन) वाले कुल बॉन्डों की संख्या और उन्हें खरीदने वाले लोगों के नाम पूछे गये. ये सवाल उन्होंने एसबीआई की 29 शाखाओं से पूछे थे.

29 में से 23 शाखाओं ने जवाब दिया. इसमें बताया गया कि 5936.7 करोड़ रु कीमत के कुल 11,770 बॉन्ड अब तक बेचे गये हैं. इनमें से 5463 बॉन्ड एक करोड़ डिनॉमिनिशन के हैं. यानी चंदे में दी गई कुल रकम का 92 फीसदी एक करोड़ रु के बॉन्डों से दिया गया. बैंक की छह शाखाओं ने अभी जवाब नहीं भेजा है.

एसबीआई की सभी शाखाओं ने दानकर्ता की गोपनीयता को वजह बताकर जानकारी नहीं दी और इसके लिये आरटीआई क़ानून की 8-1(ई) और 8-1-(जे) धाराओं का हवाला दिया. सत्याग्रह से बात करते हुये अंजलि भारद्वाज ने कहा, ‘जब सरकार चुनावी बॉन्ड स्कीम का खाका तैयार कर रही थी तो पहले इस स्कीम के शुरुआती प्रारूप में यह तय किया गया था कि बॉन्ड किसने खरीदे यह जानकारी सूचना अधिकार के दायरे से बाहर रखी जायेगी. लेकिन हम जानते हैं कि स्कीम के आखिरी प्रारूप (ड्राफ्ट) में यह प्रावधान नहीं है. इसे हटा दिया गया. इससे साफ है कि हमने जो सूचना मांगी वह क़ानून के दायरे में आती है.’
 
पूरा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 

ह्रदयेश जोशी, https://satyagrah.scroll.in/article/133749/cic-aadesh-chunavi-bond-sbi-rti-naam-gopniya-vishleshan


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