46 हजार स्कूलों के बंद होने का खतरा- राजेश शर्मा

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published Published on Jun 2, 2014   modified Modified on Jun 2, 2014
भोपाल. शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून का पालन नहीं करने वाले प्रदेश के करीब 40 हजार सरकारी और साढ़े छह हजार प्राइवेट स्कूलों पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। भोपाल में ऐसे स्कूलों की संख्या 175 है।
 
सरकार ने 1 अप्रैल 2010 में इस कानून के प्रभावी होने के बाद से नए स्कूलों को मापदंडों का पालन करने की शर्त पर ही मान्यता दी थी और इसके पूर्व से संचालित स्कूलों से भी इस कानून का पालन करने को कहा था, लेकिन स्कूलों ने इन मापदंडों को पूरा नहीं किया। 

इसके पीछे फंड की कमी बताई जा रही है। आरटीई के तहत गरीब बच्चों को प्रारंभिक कक्षा में कुल सीटों का 25 फीसदी मुफ्त एडमिशन देने का प्रावधान है, लेकिन राज्य के सरकारी और प्राइवेट कुल स्कूलों में एक लाख से अधिक सीटें खाली हैं। भोपाल में यह संख्या 7 हजार से अधिक है।

राज्य सरकार अब केंद्र में सत्तारूढ़ होने जा रही मोदी सरकार के भरोसे है, क्योंकि आरटीई के मापदंडों को पूरा करने के लिए सर्वशिक्षा अभियान के तहत केंद्र सरकार से 65 प्रतिशत फंड मिलना है, लेकिन पिछले दो साल में स्वीकृत राशि का 50 फीसदी भी नहीं मिला।
 
राज्य शिक्षा केंद्र ने पिछले वर्ष 8486 करोड़ रुपए का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था, जिसमें से करीब 3500 करोड़ रुपए ही मिले। प्रदेश में नया शैक्षणिक सत्र 16 जून से शुरू होने जा रहा है, लेकिन स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

निजी स्कूलों को मिल सकता है लाभ

सरकार ने तीन साल में सरकारी स्कूलों में आरटीई के मापदंडों के अनुरूप सुविधाएं मुहैया कराने का वादा किया था, लेकिन यह पूरा नहीं हो पाया। ऐसे में सरकारी स्कूलों में मापदंडों का पालन नहीं होने का लाभ निजी स्कूलों को मिल सकता है।

ये हैं आरटीई के मापदंड

-    प्राइमरी में 30 बच्चों पर एक शिक्षक और 150 बच्चों से ज्यादा होने पर एक प्रधानाध्यापक
-    मिडिल स्कूल में 35 बच्चों पर एक शिक्षक की व्यवस्था
-    प्राइमरी स्कूल में साल में 200 और मिडिल स्कूल में 220 दिन पढ़ाई होनी चाहिए।
-    हर क्लास के लिए अलग कक्ष।
-    शिक्षकों की योग्यता डीएड और बीएड।
-    बगैर मान्यता या मान्यता समाप्त होने पर भी संचालन तो एक लाख जुर्माना
-    छात्र-छात्राओं के लिए अलग टॉयलेट
-    स्वच्छ व सुरक्षित पेयजल
-    किचन शेड, खेल का मैदान, बाउंड्रीवॉल, लाइब्रेरी।

दिल्ली में होगा फैसला

फंड की कमी के कारण देश के अन्य राज्यों में भी मापदंडों को शत-प्रतिशत पूरा नहीं किया जा सका है। केंद्र से पिछले दो साल से स्वीकृत राशि में कटौती की जा रही है। इस साल राज्य की ओर से 7500 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। मापदंडों को पूरा नहीं करने वाले स्कूलों पर क्या एक्शन हो? इसके लिए मानव संसाधन मंत्रालय में जल्दी ही मीटिंग होने वाली है। 
-रश्मि अरुण शमी, आयुक्त, राज्य शिक्षा केंद्र
 
फैक्ट फाइल

1,14,000 प्राइमरी व मिडिल सरकारी स्कूल।
72,000  स्कूलों में बाउंड्रीवॉल नहीं।
38,594  स्कूलों में अतिरिक्तकक्ष नहीं।
51,000 स्कूलों में खेल का मैदान नहीं।
23,000 स्कूलों में लाइब्रेरी नहीं।
10,000 स्कूलों में गल्र्स टायलेट नहीं।

31 मार्च को खत्म हो गई मियाद

आरटीई के मापदंडों को तहत स्कूलों का संचालन करने के लिए तीन साल का समय दिया गया था। जो 31 मार्च 2013 को खत्म हो गया था। इसके बाद राज्य और केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से एक साल का वक्तऔर मांगा था। यह भी 31 मार्च 2014 को खत्म हो गया है। यानी नए शिक्षा सत्र में उन्हीं स्कूलों की मान्यता रहेगी जो मापदंडों को पूरा करेंगे।

अब पहले आओ, पहले पाओ की योजना 
 
आरटीई के तहत गरीब बच्चों को मुफ्त एडमिशन देने के निर्देश राज्य सरकार ने चार साल पहले दिए थे। लेकिन आरक्षित एक लाख से अधिक सीटें खाली हैं। भोपाल में 1208 सरकारी और 1150 (सीबीएसई छोड़कर) प्राइवेट स्कूलों में 7 हजार से अधिक सीटें खाली हैं। नए शिक्षा सत्र में सीट भरने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र पहले आओ, पहले पाओ की योजना शुरू करने जा रहा है।

http://www.bhaskar.com/article/MP-BPL-46-thousand-schools-in-danger-of-closure-4633260-NOR.html


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