गुरुग्राम : 'घर में ही रहें' की नसीहत के बीच सरकारी क्रूरता, 600 परिवार किये बेघर

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published Published on Aug 3, 2020   modified Modified on Aug 3, 2020

-न्यूजक्लिक, 

"कहाँ तो तय था चराग़ाँ हरेक घर के लिये,

कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिये"

दुष्यंत कुमार का यह शेर आज की स्थिति पर बिल्कुल सटीक बैठता है। सरकार का लोकसभा चुनाव में बहुत बड़ा वादा था कि जहाँ झुग्गी वहीं मकान, लेकिन इसके विपरीत वर्तमान महामारी के समय में दिल्ली-एनसीआर सहित कई राज्यों में अवैध अतिक्रमण के नाम पर लोगों को बेघर किया जा रहा है। बेघर करके उन्हें सड़कों पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर किया जा रहा है।

नया मामला हरियाणा के गुरुग्राम का है जहाँ कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच, इस सप्ताह की शुरूआत में 600 परिवारों को नगरपालिका ने बेघर कर दिया। ये सभी परिवार लगभग 25-30 वर्षों से गुरुग्राम के सिकंदरपुर इलाक़े के आरावली क्षेत्र में रहते थे।

लेकिन अब वहां सिर्फ़ मलबे का ढेर है, घर गिराए जाने के कई दिन बाद भी वहाँ के निवासी उसी मलबे के ढेर पर भारी बारिश में भी जमे हुए हैं। अपने टूटे आशियाने में अपने ज़रूरी सामने को ढूंढ रहे हैं और वो लगातर रोते हुए एक ही बात पूछ रहे हैं, 'अब हम कहाँ जाए' क्योंकि उनके पास पुनर्वास का कोई विकल्प नहीं है। जबकि क़ानूनी रूप से आप सामान्य स्थिति में किसी का भी घर पुनर्वास की व्यवस्था किये बिना नहीं तोड़ सकते हैं, लेकिन गुरुग्राम के अधिकारियों ने तो इस माहमारी के बीच ऐसा किया है। इस कृत्य को सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकारी क्रूरता बताया।

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नगर निगम अधिकारियों द्वारा इस तबाही को 27 जुलाई सोमवार को अंजाम दिया गया था। स्थानीय निवासी 22 वर्षीय राकेश ने न्यूज़क्लिक को बतया इस विध्वंस की सूचना उन लोगों को पहले नहीं दी गई थी। मात्र एक दिन पूर्व एक चेतावनी नोटिस दिया गया जब श्याम झा बस्ती के 20 घरों को तोड़ दिया गया था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ हरियाणा के गुड़गांव में स्थित सिकंदरपुर आरावली क्षेत्र में कुल 2000 झुग्गियां हैं, जिन्हें धीरे धीरे हटाया जा रहा है।

लोग स्थानीय विधायक से भी मदद मांगने के लिए उनके पास गए लेकिन वहां से भी निराशा ही हाथ लगी। उन्होंने कहा कि ये मामला ऊपर से है और वो इसमें कुछ नहीं कर सकते हैं।

इसके साथ ही स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया की निगम के अधिकारी उनके घरों का सामान भी गाड़ियों में भरकर ले गए।

उन्होंने कहा, “हमें अपना सामान इकट्ठा करने से पहले केवल कुछ घंटे दिए गए थे। कई लोगों ने इस तबाही में अपने जीवन भर की मेहनत कमाई से की बचत, वोटर आईडी और आधार कार्ड जोकि इसी बस्ती के पते पर थे सबकुछ खो दिया है।"

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


मुकुंद झा, https://hindi.newsclick.in/Gurugram-Government-brutality-600-families-rendered-homeless


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