2019 में वायु प्रदूषण से हर घंटे 13 नवजातों की मौत

Share this article Share this article
published Published on Oct 22, 2020   modified Modified on Oct 22, 2020

-डाउन टू अर्थ,

स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2020 के अनुसार वायु प्रदूषण के चलते भारत में 2019 में 116,000 से भी ज्यादा नवजात
ं की मौत
 हुई, जबकि इसके चलते 16.7 लाख लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। वैसे भी देश में शायद ही ऐसा कोई शहर है जो इस प्रदूषण के असर से बचा है। जबकि यदि वैश्विक आंकड़ों की बात करें तो इसके चलते 2019 में 476,000 नवजातों की मौत उनके जन्म के पहले महीने के भीतर ही हो गई थी। दुर्भाग्य पूर्ण यह है कि इनमें से करीब दो तिहाई (64 फीसदी) शिशुओं की मौत के लिए इंडोर एयर पॉलूशन यानी घर के भीतर का प्रदूषण जिम्मेवार है, जिसमें जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला, लकड़ी और खाना पकाने के लिए गोबर का उपयोग और उससे हो रहे प्रदूषण की एक बड़ी भूमिका थी। 

इस विषय पर हाल ही में विश्व बैंक द्वारा जार
रिपोर्ट
 से पता चला है कि दुनिया भर में करीब 400 करोड़ लोग आज भी खाना पकाने के लिए लकड़ी, कोयला, केरोसिन और गोबर जैसे ईंधन पर निर्भर हैं। यह ईंधन बड़ी मात्रा में प्रदूषण फैलाते हैं, जिसका असर ने केवल पर्यावरण बल्कि साथ ही खाना पकाने वाले के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। 

रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण न केवल शिशुओं की मौत का कारण बन रहा है बल्कि इसके साथ ही अजन्मों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहा है। गौरतलब है कि गर्भ में पल रहे शिशुओं को भी वायु प्रदूषण काफी नुकसान पहुंचा सकता है। यह बच्चों में कम वजन और समय से पहले जन्म का होना जैसी समस्यों को पैदा कर सकता है। जिसके चलते उनकी मौत तक हो सकती है। इसके साथ ही यह बच्चों के दिमागी विका
पर भी असर
 डाल सकता है। 

वैश्विक स्तर पर देखें तो रिपोर्ट के अनुसार 2019 में वायु प्रदूषण के चलते करीब 67 लाख लोगों की जान गई थी। वायु प्रदूषण के चलते स्ट्रोक, दिल के दौरे, मधुमेह, फेफड़ों के कैंसर और सांस से जुडी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। 

दिल्ली सहित देश के कई अन्य बड़े शहरों में अंतराष्ट्रीय मानकों से कहीं ज्यादा है प्रदूषण का स्तर  

भारत के लिए वायु प्रदूषण वैसे भी कोई नई समस्या नहीं है। बस केवल उसका समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। दिल्ली, कानपुर, फरीदाबाद, गया, वाराणसी, पटना, लखनऊ आदि शहरों को पहले ही दुनिया के सबसे प्रदूषित की लिस्ट में शुमार कर लिया गया है। इस रिपोर्ट के भी अनुसार देश में पीएम 2.5 का स्तर 2010 के बाद से लगातार बढ़ रहा है। जिसका खुलासा डाउन टू अर्थ की स्टेट ऑफ इंडियाज एनवा
रमेंट 2020 रिपोर्ट
 में भी किया गया था। जिसके अनुसार देश के कई बड़े शहरों में प्रदूषकों का स्तर अंतराष्ट्रीय मानकों से कहीं ज्यादा है।

यह रिपोर्ट 2019 के आंकड़ों पर आधारित है इसलिए इसमें कोरोनावायरस और उससे जुड़े लॉकडाउन और नीतियों के असर को शामिल नहीं किया गया है। लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि बढ़ता वायु प्रदूषण कोरोनावायरस के असर को और बढ़ा सकता है जिससे उससे होने वाली मौतों में भी इजाफा हो सकता है। शोध के अनुसार जिस शहर में वर्षों पहले भी पीएम 2.5 का स्तर ज्यादा था वहां कोविड-19 के कारण मृत्युदर के अधिक होने का खतरा कहीं ज्यादा है।

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


ललित मौर्य, https://www.downtoearth.org.in/hindistory/pollution/air-pollution/air-pollution-is-killing-13-newborns-every-hour-in-india-73887


Related Articles

 

Write Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later

Contact Form

Please enter security code
      Close