कोविड से जूझ रहे सरकारी अस्पतालों के बीच निजी क्षेत्र पर शिफ्ट हुआ ‘मोदीकेयर’ बिजनेस

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published Published on Aug 8, 2020   modified Modified on Aug 8, 2020

-द प्रिंट,

दो महीने की अनलॉकिंग के बाद ज़्यादातर राज्यों में, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जे) का इस्तेमाल, लॉकडाउन से पहले के स्तर पर आ गया है. लेकिन इसमें एक पेंच है. सरकारी सुविधाओं के कोविड केयर में फंसे होने के कारण, ज़्यादातर राज्यों में पीएम-जे क्लेम्स में निजी अस्पतालों की हिस्सेदारी काफी बढ़ गई है.

पीएम-जे सरकार की एक प्रमुख स्वास्थ्य बीमा स्कीम है. ये आयुष्मान भारत का हिस्सा है जिसमें द्वितीयक और तृतीयक केयर दी जाती है और जिसे मोदीकेयर भी कहा जाता है. इसके तहत सरकार का उद्देश्य ऐसे क़रीब 10.74 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपए का सालाना हेल्थ कवर मुहैया कराना है, जो भारत की आबादी का 40 प्रतिशत निचला हिस्सा हैं.

पिछले महीने पीएम-जे की कार्यान्वयन एजेंसी, नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) ने एक विश्लेषण किया. जिससे पता चला कि स्कीम के तहत पैनल पर रखे गए अस्पतालों ने कोविड से पहले का अपना 77 प्रतिशत बिज़नेस फिर से पा लिया है. लेकिन, निजी अस्पतालों में ये रिकवरी जहां 99 प्रतिशत है. सरकारी सुविधाओं में ये केवल 63 प्रतिशत है.

दिप्रिंट ने पीएम-जे के इस्तेमाल के पिछले 6 महीने के राज्यवार आंकड़े देखे और पाया कि क्लेम्स में निजी अस्पतालों की हिस्सेदारी, कोविड से पहले के स्तरों से अधिक दर्ज की गई है.

तमिलनाडु में, जुलाई में पीएम-जे क्लेम्स में निजी सेक्टर की हिस्सेदारी बढ़कर 68 प्रतिशत हो गई, जोकि लॉकडाउन से पहले (फरवरी में) 42 प्रतिशत थी. मध्यप्रदेश में ये हिस्सेदारी 41 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत हो गई और बिहार में 48 प्रतिशत से बढ़कर 67 प्रतिशत पहुंच गई. बढ़ोतरी की ये दर तमिलनाडु में 26 प्रतिशत बिंदु से लेकर गुजरात में 2 प्रतिशत बिंदु तक है और पूरे देश में ही ये बढ़ोतरी देखी गई है.

दिप्रिंट से बात करते हुए एनएचए सूत्रों ने कहा कि इन नम्बरों के बढ़ने की वजह ये है कि लॉकडाउन के दौरान पैनल पर रखने का एक सरल मॉड्यूल लॉन्च किया गया था. ताकि लोग ग़ैर-कोविड बीमारियों में अस्पताल की देखरेख से वंचित न रहें.

इस मॉड्यूल के तहत अस्पताल अस्थाई तौर से पैनल पर आने के लिए अनुरोध कर सकते थे, जिसमें पीएम-जे के तहत पंजीकरण के लिए कम से कम डिटेल्स और डॉक्युमेंट्स की ज़रूरत पड़ती थी.

लेकिन, सूत्रों ने कहा कि पब्लिक सेक्टर की रिकवरी की राह में सबसे बड़ी बाधा ये है कि अधिकांश सरकारी अस्पताल अभी भी, कोविड केयर से जूझ रहे हैं.

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


अबंतिका घोष, https://hindi.theprint.in/india/as-govt-hospitals-battle-covid-modicare-business-shifts-to-private-sector/160699/


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