क्यों कुछ लोग इस बात पर ही शक करते हैं कि कोरोना वायरस एक महामारी है

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published Published on Sep 11, 2020   modified Modified on Sep 11, 2020

-सत्याग्रह, 

कोविड-19 जैसी घातक और अतिसंक्रामक बीमारियों के लिए हिंदी में महामारी शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन अंग्रेजी में इस तरह की संक्रामक बीमारियों के लिए एक नहीं तीन शब्द हैं - एंडेमिक, एपिडेमिक और पैन्डेमिक. एंडेमिक (Endemic) ग्रीक शब्दों एन (En या In यानी में) और डेमोस (demos यानी लोग) शब्दों से बना है. एंडेमिक उस बीमारी को कहा जाता है जो किसी एक समाज, समुदाय या देश के लोगों में फैलती है. उदाहरण के लिए, मच्छरों से फैलने वाला मलेरिया एक ऐसी ही बीमारी है. इससे ज्यादातर अफ्रीकी देश प्रभावित रहते हैं इसलिए यह इन देशों के लिए एंडेमिक है. एंडेमिक के कुछ और उदाहरणों पर गौर करें तो ब्रिटेन में चिकनपॉक्स, पनामा क्षेत्रों में शागस डिजीज और कुछ कैरेबियन देशों के लिए डेंगू को भी एंडेमिक घोषित किया गया है. एंडेमिक कई बार उस क्षेत्र विशेष में हमेशा मौजूद रहने वाली बीमारी होती है.

कुछ इसी तरह के अर्थों में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द एपिडेमिक (Epidemic) पर आएं तो यह भी ग्रीक शब्द एपि (Epi या above यानी ऊपर) के साथ डेमोस को जोड़कर बना है. एपिडेमिक उस बीमारी को कहा जाता है जो बहुत थोड़े समय में बहुत सारे लोगों पर अपना असर डालती है. उदाहरण के लिए, साल 2016-17 में अमेरिका में कहर ढाने वाले ज़ीका वायरस, 2014-16 में पश्चिमी अफ्रीका में फैलने वाले इबोला वायरस और साल 2003 में एशिया के कुछ इलाकों में कोरोना वायरस (सार्स) से फैली बीमारियों को भी एपिडेमिक की श्रेणी में रखा गया है. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि एपिडेमिक शब्द सिर्फ संक्रामक बीमारियों के लिए ही नहीं, बल्कि समाज पर व्यापक नकारात्मक प्रभाव डालने वाली चीजों या चलनों के संदर्भ में भी इस्तेमाल किया जाता है. जैसे कि दुनिया भर में लोगों में बढ़ रहे मोटापे को ओबेसिटी एपिडेमिक कहा जाता है.

संक्रामक बीमारियों के सबसे घातक संस्करण को पैन्डेमिक (Pandemic) कहा जाता है. पैन्डेमिक भी ग्रीक शब्दों पैन (Pan या All यानी सभी) और डेमोस से मिलकर बना है. यानी शाब्दिक अर्थों पर जाएं तो सभी लोगों तक पहुंचने वाली बीमारी को पैन्डेमिक कहा जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की परिभाषा के मुताबिक वह संक्रामक बीमारी जो दुनिया भर में फैलती है और अधिक से अधिक लोगों को प्रभावित करती है, पैन्डेमिक कहलाती है. अगर हम यहां पर पैन्डेमिक के लिए महामारी शब्द का इस्तेमाल करें तो कोई संक्रामक बीमारी तब महामारी मानी जा सकती है जब वह -

1. बड़े पैमाने पर, ज्यादातर मामलों में वैश्विक स्तर पर, लोगों को प्रभावित करे

2. किसी ऐसे नए वायरस या पुराने/ज्ञात वायरस के उस संस्करण से उपजी हो जिसे सालों तक निष्क्रिय समझा गया हो

3. कम रोगप्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को बहुत आसानी से अपनी जद में ले सकती हो

4. बहुत सारे लोगों की मौत की वजह बन रही हो

5. इन सभी वजहों से बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलावों की वजह बन रही हो

डब्ल्यूएचओ ने इन पैमानों के आधार पर नए कोरोना वायरस सार्स-कोव-2 (SARS-CoV2) के चलते फैल रही बीमारी कोविड-19 को महामारी घोषित किया है. लेकिन अगर हम अपने आसपास के माहौल, उसमें बरती जा रही असावधानियों, इससे निपटने के लिए अब तक अपनाये गये तरीकों और हर दिन आने वाले संक्रमण के आंकड़ों पर गौर करें तो उसके इस आकलन को एक बार फिर परख लेने की ज़रूरत महसूस होती है.

मार्च के तीसरे हफ्ते में पूरे देश में तालाबंदी कर बचाव का रास्ता खोज रहे भारत में यह रिपोर्ट लिखे जाने तक अनलॉक-4.0 की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. यानी अर्थव्यवस्था, सामाजिक आयोजनों और यातायात के साधनों को दोबारा शुरू करने का काम अब अपने चौथे चरण में पहुंच चुका है. अब 169 दिनों से बंद पड़ी दिल्ली मेट्रो भी चल पड़ी है, सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की छूट मिल चुकी है, यहां तक कि अभिभावकों की लिखित अनुमति मिलने पर कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को अब स्कूल में भी बुलाया जा सकता है. मॉल, बाज़ार, दुकानें जहां अनलॉक के शुरूआती चरण में ही खुल चुके हैं. वहीं, लगभग आधी से अधिक अंतरराज्यीय रेलगाड़ियां भी चलने लगी हैं. कुल मिलाकर, कहा जा सकता है कि अगर सुरक्षा उपायों को अपनाकर घर से बाहर निकला जाए तो कंटनेमेंट ज़ोन के अलावा देश के किसी भी कोने में अब बेरोक-टोक जाया जा सकता है.

पूरा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


अंजलि मिश्रा, https://satyagrah.scroll.in/article/136041/corona-virus-covid-19-mahamaaree


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