दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक कोरोना वायरस से लड़ाई में किस रणनीति को सबसे कारगर मान रहे हैं?

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published Published on Oct 21, 2020   modified Modified on Oct 21, 2020

-सत्याग्रह,

भारत में अनलॉक 5.0 शुरू हो चुका है. लॉकडाउन खोलने के इस पांचवे चरण में पिछले दिनों देश भर के सिनेमाघर खुल चुके हैं. बेशक, अभी इन्हें आधी क्षमता के साथ ही खोला जा रहा है, ऑनलाइन बुकिंग को वरीयता देने के चलते इनके टिकट काउंटर लगभग बंद से ही हैं और इनमें खाने-पीने की सिर्फ पैकेटबंद चीजें ही फिलहाल परोसी जा रही हैं. थर्मल जांच, मास्क पहनने की अनिवार्यता और आपस में छह फीट की दूरी जैसी कई और शर्तें भी इनसे जुड़ी हुई हैं. लेकिन फिर भी सिनेमाघरों में लोगों के लौटने को ‘न्यू-नॉर्मल’ की तरफ बढ़ा एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है. इससे जुड़ी एक अच्छी खबर यह है कि न्यू-नॉर्मल यानी कुछ शर्तों के साथ सामान्य होती परिस्थितियों की तरफदारी अब सरकारों के साथ-साथ दुनिया के सबसे अच्छे डॉक्टर भी करते दिख रहे हैं.

हाल ही में दुनिया भर के 15 हज़ार से अधिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए अपनाये जा रहे लॉकडाउन जैसे उपायों की खामियों और उन्हें दूर करने के तरीके बताने वाले एक घोषणापत्र पर दस्तखत किए हैं. ग्रेट बैरिंग्टन डिक्लरेशन कहा जा रहा यह पत्र लॉकडाउन के चलते होने वाले आर्थिक, सामाजिक, शारीरिक और मानसिक नुकसानों की बात करता है और सलाह देता है कि अब वह समय आ गया है, जब कुछ सुरक्षा उपायों के साथ दुनिया को सामान्य होने की तरफ कदम बढ़ाने शुरू कर देने चाहिए.

अक्टूबर के पहले हफ्ते में अमेरिका के ग्रेट बैरिंग्टन में जारी किए गए इस घोषणापत्र को दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य वैज्ञानिकों, महामारी विशेषज्ञों और कोरोना त्रासदी से जुड़ी रणनीतियां बना रहे जानकारों ने तैयार किया है. अपने हस्ताक्षरों के साथ ग्रेट बैरिंग्टन डिक्लरेशन को जारी करने वालों में मुख्य रूप से डॉ मार्टिन कलड्रॉफ, प्रोफेसर ऑफ मेडिसिन – हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, डॉ सुनेत्रा गुप्ता, महामारी विशेषज्ञ - ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी और डॉ जय भट्टाचार्य, महामारी विशेषज्ञ – स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी शामिल हैं. इनके अलावा, कई प्रतिष्ठित यूरोपीय और अमेरिकी शिक्षण और शोध संस्थानों के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इस पर दस्तखत किए हैं.

वैज्ञानिक इस घोषणापत्र में कहते हैं कि ‘कोरोना वायरस के प्रति हमारी समझ लगातार बढ़ रही है. अब हम जानते हैं कि कोविड-19 से मौत का खतरा जितना उम्रदराज लोगों को है, उतना युवाओं को नहीं है. बच्चों को भी कोरोना वायरस, एनफ्लुएंजा जैसे वायरसों की तुलना में कम प्रभावित करता है. इसके साथ ही जैसे-जैसे लोगों में इसके लिए प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) विकसित हो रही है, सभी के लिए संक्रमण का खतरा भी कम होता जा रहा है.’ यह पत्र बताता है कि कोरोना संक्रमण के मामलों में एक बड़े तबके में रिकवरी के बाद अब दुनिया हर्ड इम्युनिटी की तरफ बढ़ रही है और धीरे-धीरे दुनिया की सारी जनसंख्या इस ओर बढ़ रही है और कोरोना वायरस का वैक्सीन इस प्रक्रिया को तेज़ कर सकता है.

हर्ड इम्युनिटी क्या होती है, इस पर थोड़ी बात करें तो जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है यह किसी हर्ड यानी झुंड के सदस्यों में मौजूद रोग प्रतिरोधक क्षमता है. किसी जनसमूह में हर्ड इम्यूनिटी होने से मतलब इसके एक बड़े हिस्से - आम तौर पर 70 से 90 फीसदी लोगों - में किसी संक्रामक बीमारी से लड़ने की ताकत विकसित हो जाना है. यानी, ये लोग बीमारी के लिए इम्यून हो जाते हैं. जैसे-जैसे इम्यून लोगों की संख्या बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे संक्रमण फैलने का खतरा कम होता जाता है. इससे उन लोगों को भी परोक्ष रूप से सुरक्षा मिल जाती है जो उस बीमारी से इम्यून नहीं हैं. इसे किसी जनसमूह की सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कहा जा सकता है. यह प्रतिरोधक क्षमता हमारे शरीर में या तो संक्रमण का शिकार होने पर विकसित होती है या फिर वैक्सीन के जरिए पैदा की जा सकती है.

ग्रेट बैरिंग्टन डिक्लरेशन पर लौटें तो इसमें यह कहा गया है कि हर्ड इम्युनिटी तक पहुंचने से पहले हमें इस तरह की नीति अपनानी होगी जिससे लॉकडाउन की वजह से होने वाले सामाजिक, आर्थिक, शारीरिक और मानसिक नुकसान और कोविड-19 से होने वाली मौतें कम से कम हों. इन वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रतिबंधों की वजह से दुनिया भर में बच्चों को जरूरी टीके नहीं लग पा रहे हैं और स्कूल न जा पाना भी उनके साथ एक बहुत बड़ा अन्याय ही है. इसके अलावा लॉकडाउन जैसी नीतियों के कारण कैंसर, हृदय और मानसिक रोगों से पीड़ित लोगों का इलाज भी ठीक से नही हो पा रहा है या लोग नई मानसिक समस्याओं के शिकार हो रहे हैं. ऊपर से कोरोना वायरस के चलते लोगों की आर्थिक समस्याएं भी बढ़ ही रही हैं जो बाकी हर तरह की समस्याओं को और भी गंभीर बना रही हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले समय में ऐसा नुकसान देखने को मिलेगा जिसकी भरपायी कर पाना संभव नहीं होगा. जाहिर सी बात है कि गरीब तबकों के मामले में यह सबसे भयावह होगा.

पूरा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


अंजलि मिश्रा, https://satyagrah.scroll.in/article/136080/coronavirus-great-barrington-declaration


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