प्रशासन की बेरुखी से उजड़ रहे उत्तरकाशी के ये गांव, नहीं हुआ विकास

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published Published on Jun 16, 2020   modified Modified on Jun 16, 2020

-द क्विंट,

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से महज 3-4 किमी की दूरी पर बसे जसपुर, सिल्याण, निराकोट गांव की आबादी लगभग एक हजार के आस-पास है, लेकिन इन गांव के ज्यादातर लोग अब जिले के नगरपालिका क्षेत्र तिलोथ गांव या मुख्य बाजार में किराए के कमरों मे रहने को मजबूर है.

गांव में पर्याप्त पानी, बिजली, खेती और मिश्रित जंगल मौजूद हैं लेकिन ऊंची पहाड़ी पर बसे इन गांव में दशकों से सड़क नहीं पहुंची. पथरीले उबड़-खाबड़ रास्तों से सफर करते करते ज्यादातर गांव वालों की उम्र बीत गई, लेकिन युवा पीढ़ी अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पलायन करने पर मजबूर हैं.

पलायन करने वाले 90 फीसदी लोग या तो दिहाड़ी-मजदूर हैं या छोटे-मोटे कारोबारी है. महज 7-8 हजार रुपये की आमदनी में ये लोग किराये के मकान में रहने को मजबूर हैं.

पलायन करना लोगों की मजबूरी है, कोई दूसरा उपाय नहीं है . बच्चों को यहां से लेन ले जाने में काफी दिक्कत होती है. अगर रोड होती तो वो यहीं से अपने बच्चों को पढ़ाते और काम करते.

पलायन करने वाले 90 फीसदी लोग या तो दिहाड़ी-मजदूर हैं या छोटे-मोटे कारोबारी है

कभी इन गांवों से बाजार की लोकल सब्जी मण्डी में सब्जियां जाती थी लेकिन आज नई पीढ़ी यातायात संसाधनों के अभाव में खेती से विमुख हो रही है.

सबसे खास बात ये है कि ये तीनों गांव प्राकृतिक जलस्त्रोत से भरपूर है जहां सिचाई और पीने का पानी की कोई दिक्कत नहीं है लेकिन आवाजाही के लिए सड़क न होने के चलते लोग गांव छोड़ने को मजबूर हैं.

कभी इन गांवों से बाजार की लोकल सब्जी मण्डी में सब्जियां जाती थी लेकिन आज नई पीढ़ी यातायात संसाधनों के अभाव में खेती से विमुख हो रही है.

हमारा गांव बहुत सुंदर है, अगर यहां सड़क होती तो यहां भी पर्यटक आते, और गांव वालों को यहीं पर रोजगार मिलता, उन्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं थी.

आजादी के 73 साल बाद भी गावों तक नहीं पहुंची पक्की सड़क
निराकोट गांव के हालत तो ये है कि यहां तक पहुंचने के लिए 3 किमी का रास्ता घने जंगल से होकर गुजरता है. निराकोट और सिल्याण गांव के हालते इतने बुरे हैं कि आजादी के 73 साल बाद भी इन गावों तक पक्की सड़क नहीं पहुंच पाई हैं.

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


कपिल पंवार, https://hindi.thequint.com/my-report/covid-19-villages-of-uttarakhand-uttarkashi-did-not-develop-dismantled-by-the-apathy-of-the-administration


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