आदिवासी ग्रामीणों से छत्तीसगढ़ सरकार इस बार सीधे खरीदेगी 225 करोड़ रुपए के लघु वनोपज, एजेंटों की मोनोपॉली होगी खत्म

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published Published on May 15, 2020   modified Modified on May 15, 2020

-द प्रिंट,

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के आदिवासियों से इस वित्तीय वर्ष में सीधे 225 करोड़ रुपये की योजना लघु वनोपज यानि माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस (एमएफपी) राज्य के आदिवासियों से खरीदेगी.

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के आदिवासियों से मामूली वन उपज (एमएफपी) खरीदने के लिए इस वित्तीय वर्ष में 225 करोड़ रुपये की योजना को बनाई है. आदिवासी कल्याण निकाय के प्रमुख ने दिप्रिंट को बताया है.

छत्तीसगढ़ स्टेट माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस कोऑपरेटिव एसोसिएशन ने मैनेजिंग डायरेक्टर संजय शुक्ला के अनुसार राज्य सरकार को उम्मीद है ऐसा करने से खरीद प्रक्रिया में जुडे मिडिल-मैन का एकाधिकार तो समाप्त होगा, और कोविड -19 महामारी के कारण आर्थिक मंदी के बीच आदिवासियों के लिए एक स्थायी आय भी होगी.

शुक्ला ने बताया, सरकार अब सीधे संग्राहकों से ही उत्पाद खरीदेगी. इससे पहले, यह एजेंटों की मदद से मामूली वन उपज की खरीद की जाती थी. ‘ इस पूरी प्रक्रिया में राज्य में काम कर रहीं महिला स्वयं-सहायता समूह अब एक बड़ी भूमिका निभा रही हैं क्योंकि उन्हें वन-उपज के डोर-टू-डोर संग्रह और फिर उन्हें केंद्र सरकार के संग्रह केंद्रों में जमा करने का काम सौंपा गया है.’

उन्होंने कहा कि निर्णय व्यावहारिक रूप से एजेंटों के एकाधिकार को समाप्त करना है. जिन्हें स्तानीय लोग कोचिया कहते हैं.

वह आगे बताते हैं, ‘ इससे ग्रामीणों को कम से कम 350 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना है. सरकार द्वारा सीधी खरीद ने भी कोचिया को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए ग्रामीणों को अधिक भुगतान करने के लिए मजबूर किया है.’

आदिवासी अंचल का यह पारंपरिक व्यवसाय करीब 1.7 लाख परिवार समेत अन्य 12 लाख लोगों की रोजी रोटी का जरिया बन चुका है. राज्य सरकार केंद्र द्वारा लघु वनोपजों की कीमतों में की जाने वाली सालाना वृद्धि पर संग्रहणकर्ताओं की मदद के लिए अपनी तरफ से 5-10 प्रतिशत लाभांश भी देगी.

दोनों सरकारों के वृद्धि दर को मिलाकर इस वर्ष इन 25 वनोपजों के समर्थन मूल्यों में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जिससे संग्रहकर्ता को काफी लाभ होने की उम्मीद है.

राज्य वनोपज खरीदी करनेवाले वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि इस वर्ष समर्थन मूल्य में की गयी वृद्धि से आदिवासी अंचल में वनोपज संग्रहणकर्ताओं की आर्थिकी को काफी मजबूती मिलेगी.

‘वनोपजों के संग्राहकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़े’
राज्य के वनमंत्री मोहम्मद अकबर का कहना है, ‘कोरोना लॉकडाउन के कारण संकट की इस घड़ी में सरकार द्वारा लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी और नगद भुगतान की प्रक्रिया से वनांचल के वनवासी-ग्रामीणों को काफी राहत मिल रही है’.

उन्होंने कहा, ‘वनोपजों के संग्राहकों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ गए हैं जिससे इस क्षेत्र के लोगों की आर्थिकी को काफी मजबूती मिलेगी.’

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.


पृथ्वीराज सिंह, https://hindi.theprint.in/india/government-of-chhattisgarh-will-buy-small-forest-produce-of-225-crore-rupees-from-tribal-villagers-this-year-will-also-give-additional-dividend/138866/


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