14 गांवों के हजारों आदिवासियों को जल-जंगल-जमीन से बेदखल कर रही गुजरात सरकार

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published Published on May 31, 2020   modified Modified on May 31, 2020

-जनज्वार, 

 गुजरात में नर्मदा जिले में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आसपास की केवड़िया कॉलोनी विस्तार में विकास के नाम पर 14 गांव को जबरन खाली करा बाड़ लगाने पहुंची सरकारी टीमों और पुलिस वालों का आदिवासी समुदाय के लोगों ने विरोध किया। इस विरोध के चलते लगभग 100 आदिवासी नेताओं और आंदोलनकारियों को पुलिस ने शनिवार 30 मई को अपनी हिरासत में ले लिया। इनमें कांग्रेस के 8 विधायक शामिल हैं। आदिवासी राज्य सरकार द्वारा यहां बाड़ लगाए जाने का विरोध कर रहे हैं।

इस मामले में जनज्वार ने विधायक अनंत पटेल से बात की तो उन्होंने बताया कि आदिवासी समन्वय मंच और अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से आदिवासियों की जमीन छीनने के विरोध में जन आंदोलन खड़ा हुआ है। सरकार के निर्णय का विरोध करने पर नर्मदा जिले में और अन्य कई आदिवासी विधायकों को पुलिस ने धर दबोचा है, इनमें अनिल जोशियारा, पीडी वासव, चंद्रिकाबेन बारिया, पुनाभाई गमित, अमरसिंह भाई चौधरी, आनंद पटेल जैसे कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया है। इस पूरी मुहिम के चलते नर्मदा जिले को भी सील कर दिया गया है, ताकि आंदोलनकारियों की मदद के लिए नर्मदा जिले तक कोई न पहुंच पाए और उनकी खबर भी जनता तक न पहुंच पाए।

यह गतिविधियां पिछले कई दिनों से चल रही हैं और आदिवासियों को अपने जल और जमीन से बेदखल किया जा रहा है। इस मामले में विधायक सियाराम मीणा से जब जनज्वार ने बात की तो वो कहते हैं, गुजरात सरकार की आदिवासियों के खिलाफ नीतियों का वह पुरजोर विरोध करते हैं। हालांकि अभी विधानसभा का सत्र चालू ना होने की वजह से वह सदन में अपनी बात नहीं रख पा रहे, लेकिन विविध संस्थाओं और जागृत लोगों के माध्यम से सरकार के बहरे कानों में आवाज पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी आंदोलन तेज किया जा रहा है, जिसमें “जेल भरो केवडिया बचाओ” आंदोलन भी है। यह आंदोलन इसलिए चलाया गया है ताकि गुजरात सरकार जो कि आदिवासी विरोधी सरकार है, उनके बहरे शासकों-प्रशासकों के कानों तक आदिवासियों की आवाज पहुंचे।

इस मामले में जनज्वार ने राज वसावा से बात की और आंदोलनकारियों का पक्ष उनसे जाना। उन्होंने कहा केवड़िया कॉलोनी में हाल में 14 गांवों के लोगों को जल और जमीन से बेदखल किया जा रहा है। उन 14 गांव में 22 से 24 हजार लोग रहते हैं और इस इलाके में 10280 हेक्टेयर जमीन कब्जाने की कोशिश की जा रही है। इस इलाके में रहने वाले आदिवासियों को यहां से जबरन निकाला जा रहा है। यह आंदोलन शुरू होते ही नर्मदा जिले को सील कर दिया गया है और वहां पर अन्य 4 जिले की पुलिस को भी उतार दिया गया है।

राज वसावा बताते हैं, लॉकडाउन के समय में सरकार को सबसे पहले लोगों की स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध करायी जानी चाहिए। माननीय गुजरात हाईकोर्ट ने भी गुजरात सरकार की बखिया उधेड़ी है, मगर सरकार को आदिवासियों को उजाड़ने में और पूंजीपतियों को अमूल्य जमीन देने की ज्यादा जल्दी है।

राज वसावा आगे कहते हैं, अहमदाबाद सिविल अस्पताल की हालत सरकार से संभल नहीं रही, ऐसे में कोरोना महामारी स्थिति में आदिवासियों पर दमन किया जा रहा है। नर्मदा जिले के आदिवासियों को अलग-थलग करके आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि यह आंदोलन गुजरात के सभी जिलों में छोटे या बड़े स्तर पर चालू हो चुका है। कोरोना से हुए लॉकडाउन को दखते हुए ना ही कोई बड़ा प्रदर्शन होगा और ना ही कोई रैली या धरना होगा। गुजरात सरकार जब दमन करने पर उतारू होती है तब वह लोगों की नहीं सुनती और पुलिस को आगे करके अत्याचार करना शुरू कर देती है।

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


दत्तेश भावसार, https://janjwar.com/post/government-of-gujarat-narmada-district-sealed-in-preparation-for-eviction-of-thousands-of-tribals-from-14-villages-43733


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