लॉकडाउन से बेरोज़गार एमबीए, इंजीनियर मिट्टी ढो रहे हैं मनरेगा में

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published Published on Sep 26, 2020   modified Modified on Sep 26, 2020

-सत्यहिंदी,

कोरोना लॉकडाउन की वजह से देश में करोड़ों लोगों की रोज-रोटी छिनी, इसमें असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की तादाद सबसे ज़्यादा है। पर ऐसा नहीं है कि इसकी मार सिर्फ़ उन्हीं पर पड़ी है। पढ़े-लिखे, एअर कंडीशन्ड ऑफ़िसों में काम करने वाले लोगों की भी नौकरी गई है। इसमे वे लोग भी शामिल हैं जो इंजीनियर हैं, एमबीए हैं, जिन्होंने संघर्ष कर गाँव की ग़रीबी से निजात पाई और शहरों में ऊँची और बड़ी नौकरियां हासिल करने में कामयाब रहे। ऐसे लोग मनरेगा के तहत काम कर रहे हैं। इंजीनयरिंग और मैनेजमेंट की पढ़ाई किए हुए लोग गांवों में मिट्टी काट रहे हैं, नहर बना रहे हैं। 

जून की तिमाही में भारत में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में शून्य से लगभग 24 प्रतिशत नीचे विकास दर दर्ज किया गया। इस एक आँकड़े से देश की आर्थिक स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है। 

12 करोड़ बेरोज़गार
वॉशिंगटन पोस्ट ने एक खबर में भारत के व्हाइट कॉलर जॉब करने वालों की स्थिति पर रोशनी डालते हुए कहा है कि कोरोना लॉकडाउन की वजह से 12 करोड़ लोगों की नौकरी चली गई। इसमें अधिकतर लोग असंगठित क्षेत्र के हैं। पर शहरों में अच्छे वेतन पर काम करने वाले लोग भी इसमें शामिल हैं। 

सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी यानी सीएमआईई ने माना है कि अप्रैल-अगस्त के बीच 2.10 करोड़ लोग बेरोज़गार हो गए। इसमें सबसे ज़्यादा मार पेशेवर काम करने वालों पर पड़ी है, जिसमें शिक्षक, अकाउंटेन्ट, इंजीनियर वगैरह हैं। 

भारत में 50 लाख से अधिक लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। इसमें रोज नए लोग जुड़ते जा रहे हैं, संख्या बढ़ती जा रही है। 

मनरेगा का सहारा
शहरों में नौकरी जाने और रोज़गार का दूसरा कोई उपाय नहीं होने के कारण ये पढ़े लिखे लोग अपने गाँवों की ओर लौट रहे हैं। उनके गाँवों में मनरेगा के तहत दिहाड़ी मिल जाती है। वे यह काम भी करने को तैयार हैं, क्योंकि दूसरा कोई काम नहीं है। 

पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


सत्यहिंदी, https://www.satyahindi.com/indian-economy/lockdown-hit-engineers-mbas-work-under-mnrega-113574.html


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