राष्ट्रीय डिजिटल हेल्थ मिशन की मसौदा नीति को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई

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published Published on Sep 14, 2020   modified Modified on Sep 15, 2020

-द वायर,

पिछले महीने सरकार ने ‘राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन’ (एनडीएचएम) के तहत लोगों से एकत्रित गोपनीय स्वास्थ्य आंकड़ों की सुरक्षा के लिए मान्य कानूनों और विनियमों के अनुपालन के साथ ही न्यूनतम मापदंडों के एक प्रारूप का प्रस्ताव रखा था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एनडीएचएम की घोषणा की थी. कार्यक्रम के मुताबिक मिशन के लिए नामांकित हर व्यक्ति को एक स्वास्थ्य पहचान-पत्र मिलेगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक उसकी पहुंच सुगम होने का दावा किया गया है.

अब इसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ‘संस्थागत समस्याएं’ एवं ‘मरीजों की निजी जानकारियों की सुरक्षा’ पर चिंता जाहिर की है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गैर-लाभकारी संस्था ‘एक्सेस नाउ’ में एशिया नीति निदेशक और वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय वकील रमन जीत सिंह चीमा ने कहा कि राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन का लक्ष्य दुनिया की सबसे बड़ी केंद्रीयकृत डिजिटल पहचान परियोजनाओं में से एक को लागू करना है, लेकिन वर्तमान मसौदा नीति में ‘संरचनात्मक समस्याएं’ हैं.

उन्होंने आगे कहा, ‘यह बिना किसी सांविधिक ढांचे के तहत जारी किया गया एक नीति दस्तावेज है और भारत के संघीय ढांचे को आंशिक रूप से प्रभावित करता है, क्योंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय है. इस नीति के तहत यह स्पष्ट नहीं है कि क्या आपको हर बार सूचित किया जाएगा कि आपका डेटा इस्तेमाल किया जा रहा है या नहीं और यह स्पष्ट नहीं है कि कौन यह सुनिश्चित करेगा.’

चीमा ने आगे कहा, ‘अगर मैं कानून लागू करने वाली एजेंसी हूं और मैं आपके पूरे मेडिकल रिकॉर्ड्स को देखना चाहता हूं कि आपको किसने क्या दवा बेची और किस उद्देश्य के लिए, तो मैं ये आसानी से प्राप्त कर सकूंगा. ऐसा होने से रोकने के लिए कोई उपाय तंत्र इसमें मौजूद नहीं है.’

विशेषज्ञों ने इस संबंध में एक और समस्या की ओर ध्यान दिलाया कि यदि कोई अपना डेटा मिटाना चाहता है तो इसकी प्रक्रिया भी आसान नहीं है.

पूरा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


द वायर, http://thewirehindi.com/139309/national-digital-health-mission-patient-personal-data-ndhm-policy/
 

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