SEARCH RESULT

Total Matching Records found : 182

छग: ज्यादातर आबादी खेती पर निर्भर, लेकिन सिंचाई का ही सिस्टम ध्वस्त

रामानुजगंज विधानसभा क्षेत्र में 2003 से 2013 तक भाजपा विधायक के कार्यकाल में सड़क, पुल-पुलियों और सिंचाई के लिए बांध बनाने में सबसे ज्यादा खर्च हुआ। पिछले साढ़े चार साल से कांग्रेस के विधायक हैं, जो कि क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करते रहे हैं, लेकिन उसके बाद भी विकास कार्यों को पहले की तरह गति नहीं मिल पा रही है। सड़क और पुल-पुलिया...

More »

जीने के मौलिक अधिकार की रक्षा-- अनूप भटनागर

अनुसूचित जाति और जनजाति (उत्पीड़न से रोकथाम)कानून के तहत शिकायत होने पर तत्काल गिरफ्तारी के प्रावधान को लचीला बनाने और जांच के बाद ही किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने संबंधी उच्चतम न्यायालय की व्यवस्था के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया उनके नजरिये को ही दर्शाती है। राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रिया को देखते हुए एक सवाल उठता है कि यदि बलात्कार और यौन उत्पीड़न की झूठी शिकायत दर्ज कराने...

More »

त्रिपुरा : 'माणिक' के बदले 'हीरा'--- रविभूषण

विश्व के किसी भी नेता की तुलना में नरेंद्र मोदी शब्दाडंबर, शब्दजाल, शब्द चातुर्य और श्लेष-प्रयोग में अकेले और अनोखे हैं. शब्द क्रीड़ा उन्हें प्रिय है और उनकी वाक्पटुता और शब्दाभिप्राय को बदलने की क्षमता-दक्षता का अन्य कोई उदाहरण नहीं है. 'माणिक' और 'हीरा' दोनों नवरत्न हैं, पर त्रिपुरा विधानसभा की चुनाव-रैली में उन्होंने त्रिपुरा राज्य को 'माणिक' के स्थान पर 'हीरा' की आवश्यकता बतायी. उनके अनुसार, त्रिपुरा की जनता...

More »

WHO ने भारतीय महिला को बनाया कैलेंडर गर्ल, जानिए गीता की कहानी

नई दिल्ली। हिमाचल की रहने वाली गीता वर्मा को दुनिया के सबसे शक्तिशाली संगठन ने अपनी कैलेंडर गर्ल बनाया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साल 2018 के कैलेंडर में जगह देकर इस संस्था ने भारत की गीता का सम्मान किया है। गीता एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं और हिमांचल के घाटियों में बसे गावों और कस्बों में अपनी स्वास्थ्य सेवाएं देती हैं। पहाड़ी इलाके के दुर्गम रास्तों में गीता अपनी बाइक...

More »

पढ़ने से ज्यादा पानी लाने में समय खर्च कर रहीं छात्रावासों की छात्राएं

श्योपुर-कराहल। पूरा जिला पेयजल संकट से जूझ रहा है। सबसे बुरे हालात कराहल और विजयपुर ब्लॉक में हैं। कराहल के कई गांव ऐसे हैं जहां ग्रामीणों को दो से तीन-तीन किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। स्कूल और छात्रावासों में लगे बोर-हैंडपंप भी सूख चुके हैं। इस कारण शिक्षण संस्थानों में भी सूखे का असर दिख रहा है। पानी के लिए छात्रावास के बच्चे भी इधर-उधर भटकने को...

More »

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later

Contact Form

Please enter security code
      Close