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न बिजली, न डीजल-ईंजन फिर भी ये आदिवासी किसान कर रहे हैं सिंचाई - बाबा मायाराम

-बाबा मायाराम, न बिजली, न मोटर, न डीजल-ईंजन फिर भी हो रही है खेतों की सिंचाई। यह अनूठा काम सरगुजा जिले के आदिवासी किसान कर रहे हैं। वे पहाड़ी नाले का पानी अपने खेतों तक ले आएं हैं, जिससे खेतों की सिंचाई हो रही है। वे पहले बारिश में सिर्फ एक ही फसल ले पाते थे, अब खरीफ की फसल धान के साथ सब्जियों की फसल भी लेते हैं।  छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले...

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वो सुधा भारद्वाज, जिनके बारे में सरकार नहीं चाहती कि आप ज्यादा जानें

-न्यूजलॉन्ड्री,  दिसंबर 2019 में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक दूषित जल शोधन संयंत्र में काम करने वाले राजकुमार साहू ने 1000 किलोमीटर की दूरी तय करके पुणे जेल में बंद 59 वर्षीय वकील सुधा भारद्वाज से मुलाकात की. पुलिस द्वारा कोर्ट लाए जाते समय कुछ पलों की भेंट के लिए इतनी लंबी यात्रा का क्या औचित्य है, इसे समझाते हुए 50 वर्षीय साहू ने बताया, "वे केवल हमारी यूनियन की...

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कंद फसल आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली छोटे अंडमान के आदिवासी किसानों की आय

-फसल क्रांति, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में रहने वाली जनजातियों में एक प्रमुख जनजाति निकोबारीज की आजीविका का मुख्य स्रोत वृक्षारोपण फसलों, मसलन नारियल और मछली पकड़ने पर आधारित है। उनकी खेती के तरीके अन्य कृषक समुदाय से बिल्कुल अलग और अद्वितीय हैं। लोग संयुक्त परिवार प्रणाली में रहते हैं और कंद और अन्य फसलों की खेती के लिए 'ट्यूहेट' बागान प्रणाली (एक संयुक्त परिवार कृषि प्रणाली जहाँ समुदाय के...

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क्यों झारखंड के आदिवासी किसानों को अपना खेत और घर खोने का डर सता रहा है?

झारखंड के चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड में आने वाले तिलहेट पंचायत के एकतारा गांव के रहने वाले प्रमोद दास कहते हैं कि उनकी आठ एकड़ जमीन पर वन विभाग ने एक साल पहले ही वन भूमि बताकर खेती करने पर रोक लगा दी है. यही चिंता तिलहेट पंचायत के एकतारा गांव के हरिशचंद्र, राजकुमार दास, आनंदी दास की भी है जिनकी क्रमशः दो एकड़, पांच एकड़ व तीन एकड़ भूमि...

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मोदी राज में किसान: डबल आमद या डबल आफत?

खेती-किसानी के मोर्चे पर केंद्र सरकार ने गुजरे चार सालों में क्या कुछ किया है, उसपर आप महज एक घंटे में राय बनाना चाहते हैं तो फिर यह पुस्तक आप ही के लिए है.(पुस्तक आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं)   किसानी के मोर्चे पर केंद्र सरकार के हासिल-लाहासिल को परखने के तीन रास्ते हो सकते हैं. एक तो सरकार के वादों को परखना कि वे किस हद तक पूरे हैं. दूसरे, सरकार के दावों...

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