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आइएमएफ का मूल्यांकन करने वाले चाहते हैं कि भारत की तर्ज पर पूंजी नियंत्रण दुनियाभर में अपनाया जाये

-द प्रिंट, पिछले तीन महीने में भारत में पूंजी की आवाजाही में भारी वृद्धि देखी गई है. मार्च से लेकर मई 2020 तक कोरोना वायरस के चलते औनेपौने भाव में बिक्री हुई जिनसे भारत से विदेशी पूंजी बाहर गई. जून से यह दिशा उलट गई, जून में कुल पोर्टफोलियो निवेश 3.4 अरब डॉलर के बराबर था, जो अगस्त में बढ़कर 6.7 अरब डॉलर के बराबर हो गया. सितंबर में मामूली पूंजी बाहर...

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दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक कोरोना वायरस से लड़ाई में किस रणनीति को सबसे कारगर मान रहे हैं?

-सत्याग्रह, भारत में अनलॉक 5.0 शुरू हो चुका है. लॉकडाउन खोलने के इस पांचवे चरण में पिछले दिनों देश भर के सिनेमाघर खुल चुके हैं. बेशक, अभी इन्हें आधी क्षमता के साथ ही खोला जा रहा है, ऑनलाइन बुकिंग को वरीयता देने के चलते इनके टिकट काउंटर लगभग बंद से ही हैं और इनमें खाने-पीने की सिर्फ पैकेटबंद चीजें ही फिलहाल परोसी जा रही हैं. थर्मल जांच, मास्क पहनने की अनिवार्यता...

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पंजाब के बाद केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर, विधेयक लाएगी राजस्थान सरकार

-द प्रिंट, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को कहा कि राजस्थान सरकार भी केंद्र द्वारा हाल ही में पारित कृषि संबंधी कानूनों के खिलाफ विधेयक लाएगी और इसके लिए जल्द ही राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा. राज्य मंत्री परिषद की मंगलवार शाम को हुई बैठक में यह फैसला किया गया. मुख्यमंत्री गहलोत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में केन्द्र सरकार द्वारा किसानों से सम्बन्धित विषयों पर बनाए गए...

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बिहार की ज्योति पासवान: एक मकान, आठ साइकिलें, लेकिन अब पहले जैसी भीड़ नहीं

-बीबीसी,  वो ज़्यादा नहीं बोलती. बोले भी तो कैसे? जब भी कोई पत्रकार, उनकी अविश्वसनीय कहानी के बारे में पता करने के लिए पहुँचता है, उनके पिता आसपास ही मौजूद रहते हैं. आने वालों से ज़्यादातर उनके पिता ही बात करते हैं. वो ख़ुद ज़्यादा कुछ नहीं बोलतीं और कई बार तो वो बातचीत के बीच में ही अचानक उठ कर चल देती हैं. लेकिन, आज वो दुबली-पतली लड़की एक सेलिब्रिटी है. लोग...

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लॉकडाउन से बेरोज़गार एमबीए, इंजीनियर मिट्टी ढो रहे हैं मनरेगा में

-सत्यहिंदी, कोरोना लॉकडाउन की वजह से देश में करोड़ों लोगों की रोज-रोटी छिनी, इसमें असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की तादाद सबसे ज़्यादा है। पर ऐसा नहीं है कि इसकी मार सिर्फ़ उन्हीं पर पड़ी है। पढ़े-लिखे, एअर कंडीशन्ड ऑफ़िसों में काम करने वाले लोगों की भी नौकरी गई है। इसमे वे लोग भी शामिल हैं जो इंजीनियर हैं, एमबीए हैं, जिन्होंने संघर्ष कर गाँव की ग़रीबी से निजात पाई और शहरों...

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