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इस साल बदलेगी पर्यावरण संरक्षण की वैश्विक कोशिशों की दशा और दिशा

-जनपथ, बात प्रकृति की हो तो ऐसा लगता है कि 2021 एक निर्णायक वर्ष साबित होगा। निर्णायक इसलिए क्योंकि इस साल दुनिया भर की सरकारें और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय संस्थाएं प्रकृति को हो रहे नुकसान को रोकने और बुरे असर को पलटने के लिए एकजुट हो रही हैं। इस क्रम में बीती 11 जनवरी को फ्रांस में वन प्लैनेट समिट का आयोजन हुआ। इस समिट का उद्देश्य था जैव विविधता...

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प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट का क्यों विरोध कर रहे हैं मछुआरे और किसान

-डाउन टू अर्थ,  महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से लगे पालघर जिले के समुद्री तट पर स्थित और पर्यावरण के लिए अति संवेदनशील क्षेत्र वाढवण में बंदरगाह निर्माण को लेकर स्थानीय लोग नाराज हैं। उनका आरोप है कि इस परियोजना के अंतर्गत पर्यावरण को होने वाले नुकसान का पर्याप्त अध्ययन नहीं किया गया। विरोध का दूसरा कारण यह है कि जैव विविधता और मछुआरों तथा किसानों की आजीविका की दृष्टि से यह पूरी...

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प्रकृति और पर्यावरण के लिए क्या महत्व रखता है आदिवासियों का सरना धर्म

-न्यूजलॉन्ड्री, देश में लंबे समय से आदिवासी समाज अपनी अलग धार्मिक पहचान की मांग करता आया है. झारखंड इस मांग का केंद्र रहा है और हाल के दिनों में यहां इस मांग ने जोर भी पकड़ा है. यही वजह है कि झारखंड के गठन के बाद पहली बार राज्य सरकार आदिवासियों के लिए अलग से धर्मावलंबी यानी सरना आदिवासी धर्म कोड लाने के लिए तीन नवंबर 2020 को एक प्रस्ताव लेकर...

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पर्यावरण अधिसूचना का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद करने से इसके मतलब बदल जाएंगे: केंद्र

-द वायर,  दिल्ली हाईकोर्ट में दायर पुनर्विचार याचिका में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने विवादित पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना-2020 के ड्राफ्ट को 22 भाषाओं में अनुवाद करने के अदालत के निर्देश का विरोध किया है. केंद्र सरकार की ओर से मंत्रालय ने दावा किया कि ऐसा करने के लिए किसी कानून की मंजूरी प्राप्त नहीं है और इसके चलते आगामी विधि निर्माण में भी मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी. केंद्र की ओर से कहा...

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छत्तीसगढ़ः पर्यावरण संरक्षण में जुटे वीरेंद्र, 35 तालाब, एक नदी और 2 कुंड किए स्वच्छ

-इंडिया वाटर पोर्टल, छत्तीसगढ़ का नाम सुनते ही लोगों के मन में एक आदिवासी राज्य की छवि बनती है, जो विकास की दौड़ में शामिल होने के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन इसी छत्तीसगढ़ में सैंकड़ों मीलों तक जंगल का इलाका फैला है, जो इस राज्य को प्राकृतिक संपदाओं से समृद्ध राज्य बनाता है। यहां सैंकड़ों नदी, तालाब और झरने आदि सहित विभिन्न जलस्रोत इंसानों सहित विभन्न जीव-जंतुओं की प्यास...

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