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2020 में हम भारतीयों को 1920 के इटली को जानने की जरूरत क्यों है?

-सत्याग्रह, मैं जीवनियां खूब पढ़ता हूं. इनमें बहुत सी विदेशी हस्तियों की होती हैं जो उनके देश, काल और परिस्थितियों के बारे में बताती हैं. हाल ही में मैंने कनाडाई विद्वान फाबियो फर्नांडो रिजी की किताब ‘बेनेडेट्टो क्रोसे एंड इटैलियन फासिज्म’ खत्म की है. इस किताब में एक महान दार्शनिक की जीवनी के सहारे उस दौर की एक बड़ी सच्चाई बताई गई है. रिजी की किताब पढ़ने के बाद मुझे 1920 के...

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क्या दूसरी पत्नी को पति की संपत्ति में अधिकार है?

-बीबीसी, हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट के सामने एक अनोखा मामला आया. मामला था कि अगर पति की मौत हो जाती है और उन्होंने दो शादियाँ की हैं तो तो मौत के बाद मिलने वाले सरकारी मुआवज़े का हक़दार कौन होगा, पहली पत्नी या दूसरी पत्नी? महाराष्ट्र रेलवे पुलिस में काम करने वाले एक सब-इंस्पेक्टर की मौत कोविड-19 से हो गई थी. वहीं राज्य सरकार ने कोविड-19 के दौरान ड्यूटी करने वाले सरकारी...

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मुस्लिम युवक का हाथ काटा, परिजनों का मॉब लिंचिग का आरोप

-न्यूजलॉन्ड्री, शुक्रवार, 11 सितम्बर को न्यूजलॉन्ड्री की टीम दोपहर करीब 3 बजे सहारनपुर जिले के ननौता कस्बे में पहुंची. वहां हमरी मुलाकात इखलाक सलमानी से उनके औसत से घर में हुई. इखलाक़ चारपाई पर लेटे हुए थे. लकड़ी के सहारे एक टूटी फूटी सी टीन डाली हुई थी, जिसमें बिजली या पंखे का कोई साधन नहीं था, उसी के नीचे घायल इखलाक को लिटाया हुआ था. उनके बड़े भाई इकबाल हाथ...

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लाठीचार्ज के बाद किसानों पर मामले दर्ज, मामला सुलझाने को भाजपा के तीन सांसद करेंगे किसानों से बात

-आउटलुक, कृषि क्षेत्र से जुड़े तीन अध्यादेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हरियाणा के किसानों पर लाठीचार्ज के बाद पुलिस द्वारा एफआइआर दर्ज किए जाने से सियासत तेज हो गई है। गुरुवार को कुरुक्षेत्र के पिपली में विरोध प्रदर्शन दौरान सड़क पर जाम लगाए जाने के मामले में पुलिस द्वारा 300 से अधिक किसानों पर केस दर्ज करने के बाद गिरफ्तारी की तैयारी है। इधर किसानांे के पक्ष में कांग्रेस...

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स्वामी अग्निवेश: आधुनिक आध्यात्मिकता का खोजी

-द वायर, 81 साल पूरे होने में कुछ रोज़ रह गए थे कि स्वामी अग्निवेश ने इस संसार से विदा ली. वे गृहस्थ नहीं थे, लेकिन संसार से उनका नाता प्रगाढ़ था. वे विरक्त कतई नहीं थे. राग हर अर्थ में उनके व्यक्तित्व को परिभाषित करता था. प्रेम, घृणा और क्रोध, ये तीनों ही भाव उनमें प्रचुरता से थे. इसलिए वे उन धार्मिकों की आख़िरी याद थे जिन्होंने धर्म के प्रति आस्था...

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