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सीवीसी को 123 भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मंज़ूरी का इंतज़ार

नई दिल्ली: केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को 123 सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के लिए विभिन्न संगठनों की मंजूरी का इंतजार है. चार महीने से अधिक समय से सीवीसी इन अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों की मंजूरी का इंतजार कर रहा है. इसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के सेवा अधिकारी, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग के अधिकारी शामिल हैं. इन आरोपियों...

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नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशनल स्कीम: 20 लाख युवाओं को करना था रोज़गार के लिए तैयार, हुए सिर्फ 2.90 लाख

नई दिल्ली: भारत वाकई दुनिया का एक अद्भुत देश है. यहां बेरोजगारी भी एक बहुत बड़ा रोजगार है. खासकर सियासत और नौकरशाही के लिए. बेरोजगारी न होती तो हजारों करोड़ रुपये का मनरेगा न होता और मनरेगा के नाम पर मची लूट न होती. एक ऐसी लूट, जिसने पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार को सांस्थानिक स्वरूप दे दिया. बेरोजगारी न होती तो दो करोड़ नौकरी हर साल देने का वादा न होता...

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क्या मोदी सरकार ने चुनावी फायदे के लिए एक स्वतंत्र और विश्वनीय लोकपाल की बलि दे दी- अंजलि भारद्वाज

एक जनवरी 2014 को राष्ट्रपति ने संसद द्वारा पारित लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून को मंजूरी दी थी. एक दमदार जन आंदोलन के बाद यह कानून बना था, जिसका मकसद भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए एक प्रभावी व स्वतंत्र लोकपाल (ऑम्बुड्समैन) बनाना था. ऐसा लोकपाल जो बिना किसी भय या पक्ष लिए उच्च स्तरीय सरकारी मशीनरी में भ्रष्टाचार के बड़े से बड़े मामलों को देखे. लोकपाल की जरूरत इसलिए महसूस की...

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दुनिया के खुशहाल देशों की रैंकिंग में लगातार तीसरे साल पिछड़ा भारत

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र विश्व खुशहाली रिपोर्ट में इस साल भारत 140 वें स्थान पर रहा जो पिछले साल के मुकाबले सात स्थान नीचे है. फिनलैंड लगातार दूसरे साल इस मामले में शीर्ष पर रहा. इस मामले में भारत अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान से भी पिछड़ गया है. संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क ने बुधवार को यह रिपोर्ट जारी की. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2012 में 20 मार्च को विश्व खुशहाली...

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स्वच्छ चुनाव के विभिन्न आयाम- अजीत रानाडे

हाल में सुप्रीम कोर्ट ने वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें ‘अपराधी' उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गयी थी. याचिकाकर्ता का तात्पर्य ऐसे उम्मीदवारों से था, जिन पर हत्या, हत्या की कोशिश, भयादोहन, बलात्कार, अपहरण या गबन के अभियोग लगे हैं, पर अभी उन्हें उक्त अपराध में दोषसिद्ध करार न दिया गया हो. चूंकि न्यायिक प्रक्रिया दशकों लंबी खिंच सकती है और जब तक...

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