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भारत बंदः ट्रेड यूनियन क्यों कर रहे हैं आज हड़ताल?

केंद्र सरकार की 'श्रमिक विरोधी नीतियों' के खिलाफ़ बुधवार को मजदूर यूनियनों ने देशव्यापी बंद का ऐलान किया है. दावा है कि हड़ताल में करीब 25 करोड़ लोग हिस्सा लेंगे. मजदूर यूनियनों का आरोप है कि सरकार श्रम कानून में बदलाव करके उनके अधिकारों का हनन कर रही है और लेबर कोड के नाम पर मौजूदा व्यवस्था को पूरी तरह ख़त्म किया जा रहा है. ट्रेड यूनियनों की प्रमुख मांगों में बेरोजगारी,...

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नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी ने चेताया- बड़ी मंदी के छोर के नजदीक है भारत, मांग सबसे बड़ी समस्या

देश की डंवाडोल अर्थव्यवस्था के बीच अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी ने चेताया है कि भारत बड़ी मंदी के छोर के बेहद नजदीक है। 1991 के आर्थिक संकट से धीमी विकास दर की तुलना करते हुए उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विकास दर दुरुस्त करने के लिए मांग (डिमांड) को बढ़ावा देने पर हमें जोर देना होगा। ये बातें उन्होंने The Indian Express के ‘एक्सप्रेस अड्डा’ कार्यक्रम...

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देश में नया श्रम कानून लागू, मगर मजदूरों के हाथ खाली

"नये श्रम कानून में सरकार अगर देश में मजदूरों की 178 रुपए कम से कम मजदूरी तय कर रही है, तो सीमेंट की बोरी ढोने वाले हम जैसे मजदूरों को दिन भर काम के बाद 250 रुपए मजदूरी मिलती है, अब आप बताइये इतनी महंगाई में 250 रुपए दिहाड़ी पर घर चलता है क्या?, तो 178 रुपए पर क्या कहेंगे," यह कहना है मजदूर दल्ला मीना का, जो राजस्थान के...

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डेयरी किसानों के लिए यह महंगाई अच्छी है

“देश के अधिकांश हिस्से में गोरक्षा की नीति नुकसानदेह रही, क्योंकि किसानों के लिए दूध नहीं देने वाले गोवंश को संभालना मुश्किल हो गया है”   सरकारें और नीति-निर्माता जनता की वाहवाही लूटने और अपने राजनैतिक हित साधने के लिए कुछ ऐसे फैसले करते हैं, जो दूसरों पर भारी पड़ते हैं, लेकिन वे खुद इसका कोई बोझ नहीं उठाना चाहते। ऐसा ही मामला दूध की कीमतों से जुड़ा हुआ है। पिछले दिनों...

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महंगाई वाली मंदी

महंगाई झेलना चाहते हैं या मंदी? अपनी तकलीफ चुन लीजिए. फिलहाल तो दोनों ही बढ़ने वाली हैं. रिजर्व बैंक के अनुसार, अगले तीन माह में जेबतराश महंगाई बढ़ेगी. और इस साल की दूसरी तिमाही में विकास दर 4.5 फीसद इस ढलान का अंतिम छोर नहीं है. अगले छह माह में मंदी गहराएगी. इस साल पांच फीसद की विकास दर भी नामुमकिन है. बचत, खपत और निवेश में कमी से बनी यह मंदी...

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