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वैज्ञानिकों की कमी से जूझ रहा है देश : प्रवीन अरोड़ा

करनाल. नित नई रिसर्च कर विदेशों में अपना डंका बजाने वाले हमारे देश में इस समय वैज्ञानिकों की भारी कमी सामने आ रही है। स्थिति यह है कि निर्धारित पदों में से भी करीब 20 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। जोकि चिंता का विषय है। ऐसे में दूसरे देशों को साइंस एंड टेक्नोलॉजी में कंपीटिशन देना भी चुनौतीपूर्ण रहता है। यह खुलासा कृषि वैज्ञानिक चयन बोर्ड के चेयरमैन डा. सीडी माई...

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प्रदेश के किसानों को विदेश में न्यौता- सुक्रांत

ब के किसान अफ्रीका और यूरोपीय देशों में खेती करने के लिए आमंत्रित किए गए हैं। इसके पहले उन देशों में अंग्रेज गए थे, पर वे वहां कृषि तकनीक का विस्तार न कर सके। इसका फायदा पंजाब के किसानों को मिल रहा है। कई अफ्रीकी देशों ने सीफेट (सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ पोस्ट हार्वेस्टिंग इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी) में पंजाब के किसानों को अपने यहां आकर खेती का न्यौता दिया है। इतना ही...

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हुजूर, कुछ तो फिक्र कीजिए

लखनऊ [स्वदेश कुमार]। उत्तरप्रदेश की इस हकीकत पर जरा नजर डालिए। भूजल स्तर से तेजी से नीचे जा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर जिलों में भूगर्भ जल का स्तर 15 मीटर के नीचे चला गया तो वहा का हर पौधा मर जायेगा। वर्तमान में 40 जिलों के 138 विकास खंड ऐसे हैं, जहा पानी का संकट गहरा चुका है। तमाम नये विकास खंड भी पानी संकट की ओर...

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पानी के लिए कोई नहीं पानी-पानी

पटना पानी चीज ही अजीब है। पानी चढ़ता है, उतरता है..पानी जमता है। टंकी पर चढ़ने वाला पानी कभी सिर पर भी चढ़ जाता है। पानी से आदमी पानी-पानी भी होता है। लेकिन सूबे में जल संचयन के लिए बने कानून को लागू करने में प्रशासन खुद पानी-पानी है। यही वजह है कि अब तक सख्ती से यह लागू नहीं हो सका है और भूजल-वाटर रिचार्ज...

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हरे कानून बदलेंगे रहन-सहन की तहजीब

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। जलवायु परिवर्तन के खतरों के खिलाफ देश में धीरे-धीरे खड़ी हो रही हरे कानूनों की नई बाड़ का असर आने वाले कुछ दिनों में आम आदमी की जिंदगी पर नजर आने लगेगा। मामला साफ हवा के नए मानकों का हो या ई-कचरे को नियंत्रित करने के पैमानों का। पर्यावरण केंद्रित नियम-कायदों का नया सांचा देश में रहन-सहन की तहजीब को नई शक्ल देने में जुटा है। बीते एक साल में सरकार...

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