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क्यों कुछ लोग इस बात पर ही शक करते हैं कि कोरोना वायरस एक महामारी है

-सत्याग्रह,  कोविड-19 जैसी घातक और अतिसंक्रामक बीमारियों के लिए हिंदी में महामारी शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन अंग्रेजी में इस तरह की संक्रामक बीमारियों के लिए एक नहीं तीन शब्द हैं - एंडेमिक, एपिडेमिक और पैन्डेमिक. एंडेमिक (Endemic) ग्रीक शब्दों एन (En या In यानी में) और डेमोस (demos यानी लोग) शब्दों से बना है. एंडेमिक उस बीमारी को कहा जाता है जो किसी एक समाज, समुदाय या देश...

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बड़ी पड़ताल: उत्तराखंड में रिवर्स माइग्रेशन, कितना टिकाऊ?

-डाउन टू अर्थ, उत्तराखंड के प्रमुख पर्वतीय शहर पौड़ी से लगभग 15 किलोमीटर दूर गांव कठूड़ की स्यारियों (गदेरे यानी बरसाती नदी से लगते खेत) में विकास रावत और आलोक चारू अपने साथियों के साथ खेत में लगी सब्जियां तोड़ रहे हैं। कुछ ही देर में आसपास के गांव के लोग ये सब्जियां खरीदने आने वाले हैं। ये लोग पेशे से सब्जी किसान नहीं हैं। विकास कोरोना संक्रमण को रोकने के...

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नौवीं से 12वीं कक्षा के लिए स्कूल खोलने की इजाज़त, स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की एसओपी

-द वायर, कोरोना महामारी के चलते लंबे समय से बंद देश भर के स्कूलों को आंशिक रूप से खोलने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी किया है. बीते मंगलवार को जारी अपने निर्देश में मंत्रालय ने 21 सितंबर से 9वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए स्कूल खोलने की इजाजत दी है. हालांकि केवल कंटेनमेंट जोन के बाहर के ही स्कूलों को खोलने की इजाजत होगी....

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भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अब निर्मला सीतारमण की जरूरत नहीं, मोदी को जयशंकर की तरह लेटरल एंट्री का सहारा लेना चाहिए

-द प्रिंट, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब जबकि लगातार गिरती अर्थव्यवस्था, अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट आई है— पर काबू पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, उन्हें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से किसी और मिसहैंडलिंग की जरूरत नहीं है. मोदी को उनकी बनाई भुरभुरी जमीन से उबरना होगा और लेटरल एंट्री को अर्थव्यवस्था बचाने के लिए अपना मंत्र बनाना होगा....

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क्या उबर पाएगा हिंदुस्तान?

-इंडिया टूडे, अर्थव्यवस्था: विशेषज्ञों की राय पहले से ही संकटों में घिरी भारत की अर्थव्यवस्था को कोविड ने जोरदार झटका दिया है और देश के सामने एक बड़ी मंदी मुंह बाए खड़ी है. इंडिया टुडे के अर्थशास्त्रियों का बोर्ड (बीआइटीई) इस बात का अंदाजा लगा रहा है कि यह कितने दिनों तक चलने वाला है और इस बीमार अर्थव्यवस्था को चंगा करने के लिए उनकी क्या सलाह है   मैत्रीश घटक, प्रोफेसर, लंदन स्कूल...

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