कई बेटियों का घर बसा चुकी हैं राजकुमारी किन्नर, अनाथ बच्चों को देती हैं माँ का प्यार!

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published Published on Jul 10, 2020   modified Modified on Jul 10, 2020

-द बेटर इंडिया,

किन्नर सुनते ही शायद नाच-गाना और बधाई देकर पैसे लेने लेने वालों की तस्वीर आपके मन में आती होगी। लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी किन्नर माँ के बारे में जो करीब 10 बच्चों का पालन पोषण अपने खर्च पर कर रही हैं।

झारखंड के बोकारो की रहने वाली यह किन्नर अपने इलाके में राजकुमारी किन्नर के नाम से लोकप्रिय हैं और लोगों के बीच सेवा-भाव की जीती जागती मिसाल के रुप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। राजकुमारी किन्नर जहाँ एक ओर सैकड़ों अनाथ बच्चों को नया जीवन दे चुकी हैं तो वहीं कई गरीब और जरुरतमंदों की शादी का खर्च भी उठाती हैं। अनाथ बच्चों की सेवा, वृद्धों की सेवा, जरुरतमंदों को कपड़े एवं खाना बांटना, अनाथालय के बच्चों की पढ़ाई के लिए खर्च देना, ये चंद उदाहरण हैं जिन्हें राजकुमारी किन्नर पिछले कई सालों से कर रही हैं।
राजकुमारी किन्नर
बोकारो के रितुडीह में लोग ऐसा मानते हैं कि राजकुमारी किन्नर के पास से कोई खाली हाथ और निराश नहीं लौटता, वह हर किसी की मदद करतीं हैं। वह अपनी कमाई का 75 फीसदी हिस्सा इन्हीं सेवा कार्यों में खर्च करती हैं और शेष राशि भी पालन पोषण कर रहे बच्चों की पढ़ाई एवं अन्य जरुरतों पर खर्च करती हैं। मोहल्ले में झगड़ा हो या घरेलू कलह, सभी मसलों को सुलझाने के लिए वह हाजिर रहती हैं। राजकुमारी ने पाँच अनाथ लड़कियों को पाला-पोसा और बड़ा किया और फिर शादी कर विदा भी कर चुकी हैं। आज वो पांचो बेटियां खुशी से अपना जीवन यापन कर रही हैं।

बचपन के दर्द ने बनाया राजकुमारी किन्नर मां

राजकुमारी किन्नर यूँ ही माँ नहीं बनीं। 10 साल की उम्र में बोकारो के चंद्रपुरा स्थित राजकुमारी के पैतृक घर से पिता ने लैंगिक कुप्रथा का हवाला देते हुए निकाल दिया था औऱ कभी भी दोबारा राजकुमारी का हाल-चाल लेने की कोशिश नहीं की। छोटी सी उम्र में इतनी बड़ी चोट खाकर भी राजकुमारी संभली। दूसरों की मदद के लिए एक अब वह एक खुली किताब बन चुकी हैं जिसे हर जरुरतमंद पढ़कर अपनी ख्वाहिशों के आसमां को छू सकता है।

55 साल की राजकुमारी किन्नर बचपन की बातें साझा करते हुए उदास हो जाती है, आंखों में पानी उनकी दर्द की कहानी बयाँ कर जाता है। रुंधे गले से राजकुमारी बताती हैं, “10 साल की उम्र में एक किन्नर होने की वजह से मुझे जो झेलना पड़ा मैं नहीं चाहती की कोई और वह महसूस भी करे, यही वजह है कि मेरे पास हमेशा दर्जनों अनाथ बच्चे होते हैं और मैं उनका पालन-पोषण कर अपना धर्म निभाती हूँ। यही नहीं मेरे 8 बच्चे हैं जिनको मैंने पालन-पोषण कर बड़ा किया है।

ढलती उम्र में भी फौलादी इरादों वाली राजकुमारी किन्नर ने द बेटर इंडिया को बताया, “अपनी 5 लड़कियों की शादी कर कन्यादान का पुण्य भी कमा लिया है। ये बच्चियां सालों पहले मुझे लावारिस मिलीं थी। उनका दर्द मुझे झकझोर गया मैंने उनको हर सुख-सुविधा देकर उनका लालन-पालन किया। फिर जब बड़ी हो गईं तो उनकी शादी अच्छे घरों में कर दी। अब वो अपनी ससुराल में सुखी हैं। उनको खुश देख कलेजे को ठंडक मिलती है।

वहीं राजकुमारी किन्नर का बेटा शुभम जो अभी स्कूल में पढ़ाई करता है, उसे अपनी मां पर गर्व है। शुभम बताते हैं, “मैं बड़ा होकर अपनी मां की तरह समाज सेवी एवं दूसरों की मदद करने वाला बनना चाहता हूँ, मेरी मां ने आज तक हमलोगों को कोई कमी नहीं होने दी है और वह मोहल्ले में सबके झगड़ों को भी दूर करती हैं।”

पूरी विजयगाथा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


कुमार विकास, https://hindi.thebetterindia.com/42663/jharkhand-rajkumari-kinnar-giving-shelter-to-orphans-social-service-coronahelp-kumar-vikas/


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